सोने-चांदी की कीमतों में भारी गिरावट
सोने-चांदी की कीमतें धड़ाम: ऑल-टाइम हाई से ₹45,000 तक टूटे दाम, जानें गिरावट की 4 बड़ी वजहें!
नई दिल्ली: सर्राफा बाजार (Bullion Market) से इस समय की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। सोने और चांदी की कीमतों में एक बार फिर भारी गिरावट दर्ज की गई है। वैश्विक बाजारों में आई भारी बिकवाली के चलते घरेलू बाजार (MCX) में सोना और चांदी अपने ऑल-टाइम हाई के रिकॉर्ड स्तर से काफी नीचे आ गए हैं। चांदी में तो अपने ऊंचे स्तरों से करीब ₹45,000 प्रति किलोग्राम तक की बड़ी गिरावट देखी जा चुकी है, जिसने निवेशकों और आम खरीदारों को चौंका दिया है।
📉 रिकॉर्ड हाई से कितना सस्ता हुआ सोना-चांदी?
वैश्विक स्तर पर मचे आर्थिक घमासान के बीच भारतीय बाजारों में कीमतें तेजी से नीचे आई हैं:
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सोने के दाम: एमसीएक्स (MCX) पर सोना जहां पहले ₹1.55 लाख प्रति 10 ग्राम के पार चल रहा था, वह अब गिरकर ₹1,46,500 से ₹1,47,500 के दायरे में आ गया है।
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चांदी की बड़ी गिरावट: चांदी की कीमतों में सबसे बुरा क्रैश देखा गया है। पिछले रिकॉर्ड स्तरों के मुकाबले चांदी करीब ₹45,000 प्रति किलो तक टूटकर अब ₹2,35,000 के आसपास कारोबार कर रही है।
🚨 इन 4 बड़ी वजहों से बाजार में आया ‘क्रैश’
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सर्राफा बाजार में आई इस ऐतिहासिक गिरावट के पीछे मुख्य रूप से ये 4 बड़े कारण जिम्मेदार हैं:
1. अमेरिकी फेड रिजर्व की तरफ से ब्याज दरें बढ़ने का डर (Fed Rate Hike Fears)
ग्लोबल मार्केट में उम्मीद थी कि केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती करेंगे, लेकिन हाल ही में आए अमेरिकी महंगाई (CPI) के आंकड़ों ने गणित बिगाड़ दिया है। यूएस में महंगाई दर बढ़कर 4.2% पर पहुंच गई है। ऐसे में आशंका है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व इस साल के अंत तक ब्याज दरों में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी कर सकता है। हाई इंटरेस्ट रेट्स के कारण निवेशक सोने (नॉन-यील्डिंग एसेट) से पैसा निकालकर बॉन्ड्स में लगा रहे हैं।
2. ‘किंग डॉलर’ की मजबूती (Strong US Dollar)
वैश्विक बाजार में अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY) मजबूत होकर अपने दो महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। चूंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी की ट्रेडिंग डॉलर में होती है, इसलिए डॉलर के मजबूत होने से अन्य देशों की करेंसी (जैसे रुपया) के लिए सोना खरीदना महंगा हो जाता है। इससे वैश्विक स्तर पर मांग प्रभावित होती है और कीमतें गिरती हैं।
3. पश्चिम एशिया संकट और कच्चे तेल (Crude Oil) का झटका
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण स्ट्रेट ऑफ हार्मुज (Strait of Hormuz) के बंद होने का खतरा पैदा हो गया है। इसके चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल (Brent Crude) $95 प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। तेल महंगा होने से दुनिया भर में महंगाई बढ़ रही है, और इस महंगाई को काबू करने के लिए केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को ऊंचा रखेंगे। इस तेल संकट ने परोक्ष रूप से गोल्ड मार्केट को नुकसान पहुंचाया है।
4. संस्थागत निवेशकों की मुनाफावसूली और लिक्विडिटी प्रेशर (Profit Booking)
साल 2025 और 2026 की शुरुआत में सोने-चांदी में आई भारी तेजी के बाद बड़े फंड मैनेजर्स और संस्थागत निवेशक (Institutional Investors) ऊंचे स्तरों पर भारी मुनाफावसूली (Profit Booking) कर रहे हैं। साथ ही, जब शेयर बाजारों में गिरावट आती है, तो बड़े फंड्स अपनी अन्य पोजीशंस को बचाने (Margin Calls को पूरा करने) के लिए सोने जैसे सबसे लिक्विड एसेट को बेचकर तुरंत कैश जुटाते हैं, जिससे बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ गया है।
💡 क्या है जानकारों की राय?
कमोडिटी एक्सपर्ट्स का मानना है कि सोने और चांदी में आई यह गिरावट शॉर्ट-टर्म (कम समय) के लिए है। लंबे समय के निवेशकों के लिए इस बड़ी गिरावट को एक ‘एक्युमुलेशन जोन’ यानी खरीदारी के अच्छे मौके के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक हालातों और डॉलर की चाल पर ही सोने की अगली दिशा निर्भर करेगी।
(गोपाल चन्द्र अग्रवाल,संपादक)
एडिटर (Allrights Magazine)

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