उत्तराखंड की मंत्री रेखा आर्या और पति पप्पू गिरधारी में अनबन: बरेली में 5 एकड़ में बन रहे आलीशान फार्म हाउस का काम छह महीने से ठप, राजनीतिक गलियारों में चर्चा
“उत्तराखंड की मंत्री रेखा आर्या और उनके पति पप्पू गिरधारी के बीच पारिवारिक अनबन: बरेली के आलीशान फार्म हाउस का निर्माण छह महीने से ठप”
विशेष रिपोर्ट: राजनीतिक गलियारे, व्यक्तिगत जीवन एवं प्रशासनिक चर्चा (ऑल RIGHTs मैगजीन)
बरेली / देहरादून: उत्तराखंड सरकार में बाल विकास एवं महिला सशक्तीकरण मंत्री रेखा आर्या और उनके पति पप्पू गिरधारी के बीच पिछले दो वर्षों से चल रही अंदरखाने की तनातनी अब खुलकर सामने आ गई है। इस पारिवारिक विवाद और दूरियों के चलते उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में बन रहा उनका बहुचर्चित और आलीशान फार्म हाउस पिछले छह महीने से पूरी तरह वीरान पड़ा है और निर्माण कार्य रुका हुआ है।
1. बरेली के लालपुर में बन रहा है 5 एकड़ का आलीशान फार्म हाउस
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राजमहल जैसी भव्य हवेली: बरेली-सीतापुर हाईवे के पास बड़े बाइपास के नजदीक लालपुर गांव में करीब 5 एकड़ भूमि पर यह विशाल फार्म हाउस बनवाया जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह आलीशान परिसर विशेष रूप से मंत्री रेखा आर्या के लिए तैयार कराया जा रहा था।
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भव्य निर्माण और डिजाइन: इस फार्म हाउस का लगभग 80 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। यहाँ सफेद खंभों, ऊंचे-ऊंचे गुंबदों और भव्य बालकनी से सजी एक ऐसी हवेली खड़ी की गई है जो किसी राजमहल जैसी नजर आती है। पूरे निर्माण में लाल पत्थरों और मार्बल का इस्तेमाल किया गया है।
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मंदिर और स्विमिंग पूल: इस परिसर के भीतर एक भव्य मंदिर, विशाल स्विमिंग पूल और एक सुसज्जित गेस्ट हाउस का निर्माण भी कराया गया है। पूर्व में मंत्री रेखा आर्या बरेली आगमन पर इसी गेस्ट हाउस या जोगी नवादा स्थित वनखंडीनाथ मंदिर के पास रुका करती थीं।
2. दो साल की तनातनी और छह महीने से रुका काम
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विवाद के कारण शहर से बनी दूरियां: स्थानीय चर्चाओं और सूत्रों के मुताबिक, पति-पत्नी के बीच पिछले दो वर्षों से वैचारिक या पारिवारिक अनबन चल रही थी, जिसके कारण मंत्री का बरेली शहर में आना-जाना कम हो गया था।
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निर्माण कार्य बंद: जैसे-जैसे आपसी तनातनी बढ़ी, रियल एस्टेट का काम करने वाले पप्पू गिरधारी ने इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट से अपना ध्यान हटा लिया और करीब छह महीने पहले फार्म हाउस का बचा हुआ काम पूरी तरह बंद करा दिया। वर्तमान में यह आलीशान परिसर वीरान स्थिति में है।
3. ‘ऑल RIGHTs मैगजीन’ का दृष्टिकोण
सार्वजनिक जीवन में सक्रिय जनप्रतिनिधियों का व्यक्तिगत और पारिवारिक जीवन अक्सर जनता और मीडिया की नजरों के केंद्र में रहता है। हालांकि यह मामला पूरी तरह पारिवारिक और आपसी मतभेद से जुड़ा है, लेकिन इसके सार्वजनिक चर्चाओं में आने से राजनीतिक गलियारों में सुगबुगाहट तेज हो गई है।
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