7.8% GDP ग्रोथ पर रघुराम राजन का सवाल
7.8% GDP ग्रोथ पर रघुराम राजन का सवाल: ‘अगर ग्रोथ तेज़ है तो जॉब्स और निवेश कहाँ हैं?’
नई दिल्ली: देश की 7.8 प्रतिशत की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि दर पर जारी तीखी बहस के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने अर्थव्यवस्था की बुनियादी चुनौतियों को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने भारत के आर्थिक विकास की गुणवत्ता, रोजगार सृजन (Job Creation) और निजी निवेश में आ रही सुस्ती को लेकर चिंता जाहिर की है। रघुराम राजन का कहना है कि यदि विकास दर का लाभ देश के युवाओं को रोजगार के रूप में नहीं मिल पा रहा है, तो भारत का डेमोग्राफिक डिविडेंड (Demographic Dividend) हाथ से निकल सकता है।
रोजगार, निजी निवेश और FDI पर उठाए गंभीर सवाल पूर्व आरबीआई गवर्नर ने अर्थव्यवस्था के प्रमुख मोर्चों पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि देश सचमुच सबसे तेजी से बढ़ रहा है, तो धरातल पर नई नौकरियां क्यों पैदा नहीं हो रही हैं। उन्होंने पूछा:
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निजी निवेश में हिचकिचाहट: देश के बड़े उद्योगपति नया पूंजीगत निवेश (Capital Expenditure) करने से क्यों कतरा रहे हैं?
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एफडीआई (FDI) की सुस्त रफ्तार: वैश्विक निवेशक इतनी बड़ी मात्रा में भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) क्यों नहीं ला रहे हैं?
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डेमोग्राफिक डिविडेंड का खतरा: यदि युवाओं के लिए पर्याप्त और उच्च गुणवत्ता वाले रोजगार के अवसर पैदा नहीं किए गए, तो भारत की युवा आबादी का आर्थिक लाभ देश को नहीं मिल पाएगा।
आर्थिक विशेषज्ञों की अलग-अलग राय रघुराम राजन के इस बयान के बाद आर्थिक और राजनीतिक हलकों में फिर से बहस छिड़ गई है। जहां आलोचक और विपक्षी दल इसे आर्थिक नीतियों की विफलता और ‘जॉबलेस ग्रोथ’ (Jobless Growth) का सुबूत बता रहे हैं, वहीं सरकारी पक्ष और कई अर्थशास्त्रियों का कहना है कि इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में सुधार और डिजिटल इकोनॉमी के बल पर देश में बड़े पैमाने पर नए और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा हो रहे हैं।
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,
सीनियर एडिटर (Allrights Magazine)

