7.8% GDP आंकड़े पर पूर्व वित्त सचिव के सवाल

7.8% GDP ग्रोथ के आंकड़ों पर पूर्व वित्त सचिव ने उठाए सवाल, धरातल पर महज 2.6% वृद्धि का दावा

नई दिल्ली: केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में जारी किए गए 7.8 प्रतिशत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि दर के आंकड़ों को लेकर देश के आर्थिक और राजनीतिक हलकों में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। एक तरफ जहां सरकार इसे भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती और तेज विकास का प्रमाण बता रही है, वहीं पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने इन आंकड़ों की गणना प्रणाली और वास्तविक विकास दर पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने दावा किया है कि यदि धरातल की वास्तविक स्थिति (Ground Reality) को देखा जाए तो देश की असली जीडीपी ग्रोथ 2.6% से अधिक नहीं है।

‘आंकड़ों और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर’: सुभाष गर्ग का दावा पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग के हालिया बयान ने आर्थिक विश्लेषकों का ध्यान आकर्षित किया है। एक साक्षात्कार के दौरान उन्होंने अर्थव्यवस्था के विभिन्न घटकों का हवाला देते हुए कहा कि आधिकारिक आंकड़ों और आम जनता द्वारा महसूस की जा रही आर्थिक स्थिति में असमानता है। उनका तर्क है कि खपत (Consumption), निजी निवेश और रोजगार के आंकड़ों को यदि व्यावहारिक रूप से देखा जाए तो विकास की वास्तविक गति सरकारी दावों से काफी कम प्रतीत होती है।

इंटरव्यू और मीडिया कवरेज पर भी गरमाई सियासत इस साक्षात्कार के सामने आने के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में मीडिया कवरेज को लेकर भी बहस तेज हो गई है। आलोचकों और विपक्षी दलों का आरोप है कि मुख्यधारा का मीडिया सरकार की आर्थिक उपलब्धियों का ढिंढोरा पीट रहा है और अर्थव्यवस्था से जुड़ी जमीनी चुनौतियों व विशेषज्ञों की चेतावनियों को दबाने का प्रयास कर रहा है। वहीं, आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि जीडीपी की गणना पद्धति (Methodology) और बेस इफेक्ट (Base Effect) पर खुली चर्चा होना अर्थव्यवस्था के स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है।

गोपाल चन्द्र अग्रवाल,

सीनियर एडिटर (Allrights Magazine

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

%d bloggers like this: