बाल श्रम पर सियासत: विपक्ष का सरकार पर वार
‘अमृतकाल’ में बाल श्रम पर सियासत तेज़: मासूमों के हाथों में ईंटों के बोझ को लेकर विपक्ष का केंद्र सरकार पर हमला
नई दिल्ली: देश में बच्चों के अधिकार, मुफ्त शिक्षा और बाल श्रम (Child Labour) के उन्मूलन को लेकर राजनीतिक बहस एक बार फिर गरमा गई है। विपक्ष ने ‘अमृतकाल’ और ‘विश्व गुरु’ के नारों के बीच बाल श्रम की घटनाओं को लेकर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों पर तीखा हमला बोला है। विपक्ष का आरोप है कि देश के भविष्य (बच्चों) के हाथों में किताबें होने के बजाय उनसे ईंट-भट्ठों और बाल श्रम के अन्य कार्यों में मजदूरी कराई जा रही है।
‘किताबों की जगह ईंटों का बोझ, ऐसे कैसे बनेगा विश्व गुरु?’: विपक्ष विपक्षी दलों और बाल अधिकार कार्यकर्ताओं ने सवाल उठाया है कि शिक्षा का अधिकार (RTE) कानून लागू होने के बावजूद देश के कई राज्यों से बाल श्रम की तस्वीरें सामने आना चिंताजनक है। विपक्षी नेताओं ने सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े करते हुए कहा, “अमृतकाल का दावा करने वाली सरकार में बच्चों के हाथों से किताबें छीनकर उन्हें ईंटों का बोझ ढोने पर मजबूर किया जा रहा है। यदि देश का बचपन कुपोषण और बाल मजदूरी की भेंट चढ़ जाएगा, तो भारत विश्व गुरु कैसे बनेगा?”
सरकार का रुख: शिक्षा और कल्याणकारी योजनाओं का दिया हवाला दूसरी ओर, केंद्र सरकार और सत्तापक्ष का कहना है कि बाल श्रम को पूरी तरह समाप्त करने के लिए सरकार ‘समग्र शिक्षा अभियान’, ‘पीएम पोषण (मिड-डे मील)’ और ‘समेकित बाल विकास योजनाओं’ के माध्यम से लगातार कदम उठा रही है। सरकार का तर्क है कि सर्व शिक्षा अभियान और मुफ्त शिक्षा के जरिए ड्रॉपआउट रेट में भारी कमी आई है तथा बाल श्रम कराने वाले नियोक्ताओं और ईंट-भट्ठा मालिकों के खिलाफ कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जा रही है।
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,
सीनियर एडिटर (Allrights Magazine)

