महिला अधिकारों पर राहुल-प्रियंका से सवाल
‘Smash the Patriarchy’ नारे और महिला अधिकारों पर कांग्रेस की परीक्षा: मौलानाओं की टिप्पणी पर राहुल-प्रियंका से रुख स्पष्ट करने की मांग
नई दिल्ली: देश में महिला अधिकारों और ‘स्मैश द पैट्रियार्की’ (पितृसत्तात्मक सोच को खत्म करने) की पुरजोर वकालत करने वाले कांग्रेस नेतृत्व की अब नई परीक्षा शुरू हो गई है। मनुस्मृति और हिंदू सामाजिक व्यवस्था पर लगातार सवाल उठाने वाले लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और वायनाड से सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के रुख पर विपक्षी दल और सामाजिक विश्लेषक सवाल खड़े कर रहे हैं। मामला मुस्लिम धर्मगुरुओं द्वारा महिलाओं की आजादी और उनके काम करने को लेकर दिए गए हालिया विवादित बयानों से जुड़ा हुआ है।
मौलानाओं के बयान: ‘महिलाएं तिजोरी का सोना’ और ‘समाज पर बोझ’ विवाद की शुरुआत ग्रैंड मुफ्ती अबू बकर अहमद और मौलाना अब्दुल हाकिम अंसारी जैसे मुस्लिम धर्मगुरुओं की टिप्पणियों के बाद हुई। एक तरफ जहां ग्रैंड मुफ्ती ने महिलाओं को ‘तिजोरी में रखे सोने’ की तरह घरों के भीतर सीमित रखने की वकालत की, वहीं अब्दुल हाकिम अंसारी ने महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने और बाहर जाकर नौकरी करने पर सवाल उठाते हुए उन्हें परिवार के लिए बोझ बताया। इन बयानों को महिला स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों के खिलाफ माना जा रहा है।
राजनीति के दोहरे रवैये पर उठे सवाल, मुस्लिम लीग की चुप्पी पर निशाना आलोचकों का तर्क है कि ‘स्मैश द पैट्रियार्की’ का नारा किसी एक धर्म या राजनीतिक मंच तक सीमित नहीं हो सकता। महिला सशक्तिकरण का दावा करने वाली कांग्रेस पार्टी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से मांग की जा रही है कि वे इन रूढ़िवादी और पितृसत्तात्मक बयानों पर भी अपना स्टैंड साफ करें। इसके साथ ही, केरल में कांग्रेस की सहयोगी पार्टी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) पर भी दबाव बन रहा है कि वह तय करे कि वह महिलाओं की आजादी के साथ खड़ी है या इस संकीर्ण मानसिकता का समर्थन करती है।
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,
सीनियर एडिटर (Allrights Magazine)

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