जनता की सेहत से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं:

 

जनता की सेहत से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं: मिलावटखोरों पर हो सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई

आपकी बात बिल्कुल सही है, लोगों की सेहत के साथ ऐसा खिलवाड़ वाकई बेहद गंभीर और चिंताजनक है। चंद पैसों के मुनाफे के लिए एक्सपायर्ड और असुरक्षित तेल का इस्तेमाल करना सीधे तौर पर लोगों की जान जोखिम में डालना है।

बरेली (ब्यूरो): परसाखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र की एक नमकीन फैक्ट्री में खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा मारा गया छापा इस बात का जीता-जागता सबूत है कि मुनाफे की अंधी दौड़ में कुछ कारोबारी इंसानी जिंदगियों को दांव पर लगाने से भी नहीं कतरा रहे हैं। फैक्ट्री में मई 2026 में एक्सपायर हो चुके पाम ऑयल के 89 टिन (1,335 किलोग्राम) मिलना यह साफ करता है कि यह लापरवाही नहीं, बल्कि सोची-समझी साजिश थी।

त्योहारों और आम दिनों में चाव से खाए जाने वाले इन स्नैक्स में अगर ऐसे घातक और दूषित तेल का इस्तेमाल होगा, तो यह सीधे तौर पर जनता के स्वास्थ्य पर जानलेवा हमला है।

कानून में ढिलाई क्यों? ऐसे मामलों में हो कड़ी सजा

ऐसे मिलावटखोरों और बिना बैच नंबर के प्रतिबंधित सामान बेचने वालों के खिलाफ सिर्फ नोटिस जारी करना या जुर्माना लगाना काफी नहीं है:

  • गैर-जमानती धाराओं में हो केस: ऐसे मामलों में सिर्फ खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत ही नहीं, बल्कि आईपीसी (भारतीय न्याय संहिता) की उन गंभीर धाराओं के तहत कार्रवाई होनी चाहिए जो सीधे तौर पर मानव जीवन को संकट में डालने से जुड़ी हैं।

  • लाइसेंस हो हमेशा के लिए रद्द: जो फैक्ट्रियां अमानक और एक्सपायर्ड सामान का इस्तेमाल करती हैं या जहां भारी गंदगी पाई जाती है (जैसे छापेमारी में ‘एके नमकीन फैक्ट्री’ में मिली), उनका मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस तुरंत और हमेशा के लिए रद्द किया जाना चाहिए।

  • सप्लाई चेन पर भी हो प्रहार: यह तेल जहां से खरीदा गया और जिस कंपनी ने बिना बैच नंबर के इसकी सप्लाई की, उन पर भी बराबर की कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।

उपभोक्ता सुरक्षा सर्वोपरि

खाद्य सुरक्षा विभाग ने सैंपल लेकर लैब तो भेज दिए हैं, लेकिन जनता की मांग है कि ऐसी जांचों की रिपोर्ट फास्ट-ट्रैक मोड पर आए ताकि आरोपी बच न सकें। बाजार में बिकने वाली हर खाने-पीने की चीज की शुद्धता सुनिश्चित करना प्रशासन की पहली जिम्मेदारी है, क्योंकि सेहत से बड़ा कोई अधिकार नहीं है।



(गोपाल चन्द्र अग्रवाल,संपादक)

 (एडिटर (Allrights Magazine)

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