देहरादून में छात्रों की गूंज आंदोलन

देश के युवाओं की हुंकार: 17 जुलाई को देहरादून में गूंजेगी ‘छात्रों की गूँज’

देहरादून/नई दिल्ली: “भ्रष्ट, अन्यायी, पक्षपाती, बेईमान” — ये वो तीखे और कड़वे शब्द हैं, जो आज देश के करोड़ों युवा और प्रतियोगी छात्र भारत की मौजूदा शिक्षा व्यवस्था के लिए इस्तेमाल करने पर मजबूर हो गए हैं। देश के कोने-कोने से आ रही आवाजों और छात्रों के आक्रोश को देखते हुए अब यह साफ हो चुका है कि जो व्यवस्था बच्चों के सुनहरे भविष्य को संवारने और तैयार करने के लिए बनी थी, वह आज उन्हें और उनके परिवारों को केवल कर्ज, अत्यधिक मानसिक तनाव और गहरी निराशा के दलदल में धकेल रही है।

इसी गंभीर मुद्दे को लेकर आगामी 17 जुलाई को देहरादून की धरती पर छात्रों के अधिकारों और व्यवस्था में बदलाव के लिए एक बड़े आंदोलन ‘छात्रों की गूँज’ का शंखनाद होने जा रहा है।

शिक्षा व्यवस्था या ‘वसूली तंत्र’? पेपर लीक माफिया का बढ़ता जाल

आज देश का हर सजग नागरिक और युवा यह महसूस कर रहा है कि भारत की शिक्षा व्यवस्था अब एक ‘बेईमान वसूली तंत्र’ का रूप लेती जा रही है। इस लचर और भ्रष्ट प्रशासनिक ढांचे ने देश में एक बेहद खतरनाक ‘पेपर लीक माफिया’ को जन्म दे दिया है।

  • सालों की मेहनत पर पानी: दिन-रात एक कर, भूखे-प्यासे रहकर सालों-साल प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले लाखों होनहार छात्रों की मेहनत को यह माफिया एक झटके में लूट लेता है।

  • दोषियों को इनाम, छात्रों को सजा: देश की विडंबना देखिए कि जहां गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार वेंडर्स (Vendors) और भ्रष्ट अधिकारियों को नए टेंडर और विभागीय तरक्कियां बांटी जाती हैं, वहीं इसकी असली सजा उन निर्दोष छात्रों को भुगतनी पड़ती है, जिन्हें अंत में उनके टूटे हुए सपनों के साथ बिल्कुल अकेला छोड़ दिया जाता है।

सरकार की चुप्पी और मुख्यधारा की मीडिया का सन्नाटा

इस पूरे संकट के बीच सबसे ज्यादा परेशान करने वाली बात शासन-प्रशासन और शीर्ष नेतृत्व का रवैया है। मोदी सरकार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के सामने देश के युवाओं का भविष्य अंधकार में जा रहा है, लेकिन शीर्ष स्तर पर केवल चुप्पी छाई हुई है और जवाबदेही से पूरी तरह मुंह मोड़ लिया गया है। वहीं, देश की मुख्यधारा की मीडिया (Mainstream Media) में भी इस बड़े संकट को लेकर एक लंबा और रहस्यमयी सन्नाटा पसरा हुआ है, जिसने छात्रों की हताशा को और बढ़ा दिया है।

अब वक़्त है ‘Education Revolution’ का: देहरादून चलो!

अब पानी सिर से ऊपर जा चुका है। टूटे हुए सपनों और ठगे जा रहे युवाओं के सब्र का बांध अब टूट रहा है। अब वक्त आ गया है जब शिक्षा व्यवस्था की इस तानाशाही और भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ा ‘Education Revolution’ (शिक्षा क्रांति) शुरू किया जाए।

देश के युवाओं के हक की इस लड़ाई को धार देने और उनकी आवाज को सत्ता के गलियारों तक पहुंचाने के लिए 17 जुलाई को देहरादून में ‘छात्रों की गूँज’ कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। देश के सभी छात्रों, अभिभावकों और जागरूक नागरिकों से अपील की जा रही है कि वे भारी से भारी संख्या में इस मुहिम से जुड़ें और व्यवस्था को बदलने के लिए अपनी आवाज बुलंद करें।


(गोपाल चन्द्र अग्रवाल,संपादक)

 (एडिटर (Allrights Magazine)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

%d bloggers like this: