लॉजिस्टिक्स से बदलेगी माइनिंग की किस्मत

लॉजिस्टिक्स सुधार से वैश्विक दौड़ में आगे बढ़ेगा भारत: माइनिंग को मिलेगी नई रफ्तार

मुंबई/नई दिल्ली: भारत का खनन और धातु (Mining & Metals) क्षेत्र वैश्विक स्तर पर अपनी प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त को और अधिक मजबूत कर सकता है, बशर्ते देश में लॉजिस्टिक्स को केवल एक माल परिवहन का जरिया न मानकर एक रणनीतिक आधार के रूप में देखा जाए। फिक्की (FICCI) द्वारा आयोजित ‘एन्हांसिंग कॉम्पिटिटिवनेस ऑफ माइनिंग एंड मेटल्स’ सम्मेलन में देश के प्रमुख विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं ने इस क्षेत्र के विकास को लेकर कई महत्वपूर्ण विचार साझा किए।

विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि यद्यपि भारत में माल ढुलाई (Freight) की लागत दुनिया के कई देशों के मुकाबले प्रतिस्पर्धी है, लेकिन बिखरे हुए मल्टीमॉडल नेटवर्क, खदानों तक कमजोर कनेक्टिविटी और सड़क परिवहन पर अत्यधिक निर्भरता के कारण उद्योग की गति धीमी हो रही है। इस समस्या से निपटने के लिए सम्मेलन में आधुनिक तकनीक, समर्पित फ्रेट कॉरिडोर और डिजिटल समाधानों को अपनाने पर विशेष जोर दिया गया।

प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए डॉ. सारस्वत की ’10 सूत्रीय राष्ट्रीय रणनीति’

पूर्व नीति आयोग सदस्य डॉ. वी. के. सारस्वत ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, “लॉजिस्टिक्स को माइनिंग और मेटल्स सेक्टर की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता का रणनीतिक निर्धारक माना जाना चाहिए।” उन्होंने रेखांकित किया कि खदानों तक पहले और आखिरी मील की कमजोर कनेक्टिविटी, सड़क परिवहन पर अत्यधिक निर्भरता और खनिज ढुलाई की मौजूदा चुनौतियां उद्योग की ओवरऑल लागत को बढ़ा रही हैं।

इन समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए उन्होंने एक 10 सूत्रीय राष्ट्रीय रणनीति का सुझाव दिया, जिसमें मुख्य रूप से शामिल हैं:

  • समर्पित मिनरल फ्रेट कॉरिडोर (Dedicated Mineral Freight Corridors) का निर्माण।

  • कन्वेयर सिस्टम और स्लरी पाइपलाइन नेटवर्क का विस्तार।

  • पोर्ट मैकेनाइजेशन (बंदरगाहों का आधुनिकीकरण) और संपूर्ण लॉजिस्टिक्स का डिजिटलाइजेशन।

फिक्की-डेलॉइट की रिपोर्ट: बुनियादी ढांचे में सुधार जरूरी

सम्मेलन के दौरान जारी की गई फिक्की-डेलॉइट (FICCI-Deloitte) की संयुक्त रिपोर्ट के अनुसार, भारत का फ्रेट टैरिफ वैश्विक मानकों के बिल्कुल अनुरूप और प्रतिस्पर्धी है, लेकिन देश का बिखरा हुआ लॉजिस्टिक्स नेटवर्क इसकी वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त को कम कर रहा है।

इस दिशा में रेलवे के कदमों की जानकारी देते हुए रेलवे बोर्ड के अतिरिक्त सदस्य (ट्रैफिक) देवेंद्र कुमार ने बताया कि रेलवे अब एंड-टू-एंड लॉजिस्टिक्स सेवाओं का तेजी से विस्तार कर रहा है। उन्होंने भविष्य की एक बड़ी योजना का खुलासा करते हुए कहा कि आने वाले समय में दो किलोमीटर लंबी मालगाड़ियां भी भारतीय रेलवे ट्रैक पर दौड़ती हुई दिखाई दे सकती हैं, जिससे ढुलाई क्षमता में भारी इजाफा होगा।

‘विकसित भारत 2047’ का मार्ग होगा प्रशस्त

सम्मेलन में विशेषज्ञों ने सर्वसम्मति से यह रेखांकित किया कि वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के बड़े लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश की माल ढुलाई क्षमता में कई गुना वृद्धि करना अनिवार्य है। इसके लिए एक आधुनिक, एकीकृत और टिकाऊ (Sustainable) लॉजिस्टिक्स अवसंरचना का निर्माण समय की मांग है।


(गोपाल चन्द्र अग्रवाल,संपादक)

 (एडिटर (Allrights Magazine)

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