यूपीएसएसएससी परीक्षा में नकल गिरोह का पर्दाफाश
यूपी STF का बड़ा एक्शन: सहायक बोरिंग टेक्नीशियन परीक्षा में इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस से नकल कराने वाले गिरोह के 13 सदस्य गिरफ्तार
लखनऊ/वाराणसी: उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) द्वारा आयोजित लघु सिंचाई विभाग में सहायक बोरिंग टेक्नीशियन मुख्य परीक्षा में एक बड़े नकल रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है। उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (UP STF) की वाराणसी फील्ड इकाई ने मुस्तैदी दिखाते हुए इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के जरिए परीक्षा में नकल कराने वाले एक संगठित गिरोह के कुल 13 अभियुक्तों को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है।
एसटीएफ ने अभियुक्तों के पास से 4 इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, 11 मोबाइल फोन, 2 प्रिंटर, 2 प्रवेश पत्र, 2 प्रश्न पत्र और 2 ओएमआर (OMR) शीट बरामद की हैं। यह पूरी कार्रवाई 12 जुलाई 2026 को दोपहर करीब 01:40 बजे अंजाम दी गई।
इन स्थानों से हुई गिरफ्तारियां
गिरोह के सदस्यों और नकल कर रहे अभ्यर्थियों को उत्तर प्रदेश के अलग-अलग परीक्षा केंद्रों और ठिकानों से दबोचा गया:
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एंग्लो इंडियन मुस्लिम इंटर कॉलेज, लल्लापुरा, थाना सिगरा, जनपद वाराणसी।
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हरिश्चंद्र बालिका इंटर कॉलेज, मैदागिन, थाना कोतवाली, जनपद वाराणसी।
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ग्राम रामगढ़ कोठारी, थाना बहरिया, जनपद प्रयागराज।
गिरफ्तार अभियुक्तों का विवरण
एसटीएफ द्वारा गिरफ्तार किए गए 13 अभियुक्तों की सूची इस प्रकार है:
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कप्तान सिंह पटेल (निवासी: प्रयागराज)
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ओम प्रकाश पटेल (निवासी: प्रयागराज)
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राकेश कुमार पटेल (निवासी: प्रयागराज)
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रविकान्त वर्मा उर्फ अखिलेश (निवासी: प्रतापगढ़)
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धर्मेन्द्र कुमार सिंह (निवासी: प्रयागराज)
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लालता प्रसाद उर्फ गुड्डू (निवासी: प्रयागराज)
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अनुज कुमार पाल (निवासी: प्रयागराज)
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शिव प्रकाश पटेल (निवासी: प्रयागराज)
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मनोज कुमार (निवासी: प्रतापगढ़)
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विपिन कुमार वर्मा (अभ्यर्थी, निवासी: प्रतापगढ़)
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धर्मेन्द्र कुमार (अभ्यर्थी, निवासी: प्रतापगढ़)
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चन्दर (निवासी: प्रतापगढ़)
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दीपक पटेल (निवासी: प्रतापगढ़)
(नोट: गिरोह के दो मुख्य सदस्य शिवजीत पटेल और राजेंद्र यादव उर्फ धीरेंद्र यादव भीड़ का फायदा उठाकर मौके से फरार होने में कामयाब रहे, जिनकी तलाश जारी है)।
प्रति अभ्यर्थी 5 लाख रुपये में सौदा: ऐसे काम करता था गिरोह
एसटीएफ की पूछताछ में सामने आया कि इस संगठित गिरोह का सरगना शिवजीत पटेल है। यह गिरोह सीधे भोले-भले अभ्यर्थियों को जाल में फंसाकर उनसे मोटी रकम ऐंठता था:
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लाखों की डीलिंग: गिरफ्तार अभ्यर्थी धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि उसने कप्तान सिंह पटेल के खाते में 3.75 लाख रुपये ट्रांसफर किए थे और 1.25 लाख रुपये नकद दिए थे। वहीं दूसरे अभ्यर्थी विपिन कुमार वर्मा ने नकल के लिए 5 लाख रुपये नकद और डिवाइस के नाम पर 25 हजार रुपये दिए थे।
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हाईटेक नकल का तरीका: दीपक पटेल और राजेंद्र यादव परीक्षा के लिए माइक्रो इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की व्यवस्था करते थे। परीक्षा शुरू होते ही प्रश्न पत्र को प्रयागराज में एक गुप्त स्थान पर बैठे ‘सॉल्वरों’ (Solvers) तक भेजा जाता था।
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सॉल्वरों को 20-20 हजार: सॉल्वर प्रश्न पत्र हल करके सीधे अभ्यर्थियों के कान में छुपाई गई माइक्रो डिवाइस पर फोन के जरिए सही उत्तर (ऑप्शन) बोलकर लिखवाते थे। इस काम के लिए प्रति सॉल्वर को 20-20 हजार रुपये दिए जाते थे। परीक्षा केंद्र के बाहर गतिविधियों पर नजर रखने के लिए गिरोह के गुर्गे भी तैनात रहते थे।
कानूनी कार्रवाई शुरू
एसटीएफ की इस कार्रवाई के बाद वाराणसी के स्थानीय थानों में सख्त धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कराया जा रहा है:
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थाना सिगरा में मु०अ०सं० 300/2026 धारा 4/8/13(1)(2)(3) उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा (निवारण) अधिनियम पंजीकृत किया गया है।
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कोतवाली वाराणसी में मु०अ०सं० 170/2026 इन्हीं गंभीर धाराओं के तहत दर्ज किया जा रहा है।
आगे की वैधानिक और कानूनी कार्रवाई अब स्थानीय पुलिस द्वारा अमल में लाई जा रही है।
प्रेस नोट साभार: स्पेशल टास्क फोर्स, उत्तर प्रदेश, लखनऊ (प्रेस नोट संख्या: 208)
(गोपाल चन्द्र अग्रवाल,संपादक)
(एडिटर (Allrights Magazine)

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