**ट्रेन में पत्थर लगने से यात्री घायल**
ट्रेन में पत्थर लगने से यात्री का पैर टूटा, जीआरपी को कहानी पर संदेह; जांच के बाद होगी कार्रवाई
जागरण संवाददाता, बरेली। पूर्वोत्तर और उत्तर रेलवे के व्यस्त रेल मार्गों पर ट्रेनों में सफर करने वाले यात्रियों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ताजा मामला बरेली रेल मंडल के अंतर्गत सामने आया है, जहां एक चलती ट्रेन में यात्रा कर रहे युवक के पैर पर अचानक भारी पत्थर आ लगा। पत्थर इतनी गति और तेजी से लगा कि युवक का पैर मौके पर ही फ्रैक्चर हो गया। घटना के बाद ट्रेन में सवार यात्रियों में हड़कंप मच गया।
आनन-फानन में पीड़ित यात्री को नजदीकी स्टेशन पर उतारकर प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराया गया और मामले की सूचना राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) को दी गई। हालांकि, इस पूरे मामले में जीआरपी का रुख काफी सतर्कता भरा है। पीड़ित और उसके परिजनों का स्पष्ट आरोप है कि किसी अज्ञात अराजक तत्व ने बाहर से ट्रेन पर पथराव किया था, लेकिन जीआरपी अधिकारियों के गले यह बात आसानी से नहीं उतर रही है। रेलवे पुलिस को घटनाक्रम में कई झोल नजर आ रहे हैं, जिसके चलते जीआरपी ने मामले को संदिग्ध मानते हुए गहन जांच-पड़ताल शुरू कर दी है।
कैसे हुई घटना और यात्री का आरोप
जानकारी के अनुसार, पीड़ित युवक ट्रेन में अपनी निर्धारित सीट पर बैठकर यात्रा कर रहा था। ट्रेन जब बरेली रेलवे परिक्षेत्र के पास से गुजर रही थी, तभी अचानक एक तेज आवाज के साथ बड़ा पत्थर खिड़की या ट्रेन के खुले हिस्से के पास आकर सीधे युवक के पैर पर लगा। पत्थर का प्रहार इतना तीव्र था कि युवक दर्द से कराह उठा। साथी यात्रियों ने जब देखा तो युवक का पैर बुरी तरह सूज चुका था और वह सीधे खड़े होने की स्थिति में भी नहीं था।
यात्रियों ने तुरंत टीटीई और जीआरपी कंट्रोल रूम को इसकी जानकारी दी। इसके बाद ट्रेन के अगले स्टेशन पहुंचने पर रेलवे मेडिकल टीम ने प्राथमिक जांच की, जिसमें पैर की हड्डी टूटने (फ्रैक्चर) की पुष्टि हुई।
पीड़ित का आरोप है कि असामाजिक तत्वों द्वारा रेलवे ट्रैक के किनारे से ट्रेन पर जानबूझकर पथराव किया गया है। आए दिन रेल पटरियों के आसपास बच्चों या शरारती तत्वों द्वारा चलती ट्रेनों पर पत्थर फेंकने की घटनाएं सामने आती रहती हैं, और यह घटना भी उसी लापरवाही का नतीजा है। पीड़ित परिवार ने मांग की है कि जीआरपी अज्ञात पथराव करने वालों के खिलाफ सख्त धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार करे।
जीआरपी को क्यों है कहानी पर संदेह?
मामले की सूचना मिलते ही राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) की टीम ने घटनास्थल और पीड़ित यात्री के बयान दर्ज किए। हालांकि, जीआरपी अधिकारियों का मानना है कि प्राथमिक दृष्टया यह मामला पूरी तरह से बाहरी पथराव का नहीं लग रहा है। जीआरपी के अधिकारियों का कहना है कि:
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पत्थर की दिशा और चोट का कोण: चलती ट्रेन में जिस खिड़की या स्थान पर युवक बैठा था, वहां से पत्थर अंदर आकर सीधे पैर की हड्डी तोड़ दे—यह तकनीकी रूप से थोड़ा असामान्य प्रतीत होता है।
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अन्य यात्रियों के बयान: कोच में आसपास बैठे अन्य सह-यात्रियों से जब पूछताछ की गई, तो अधिकांश लोगों ने बाहर से कोई भारी पत्थर फेंके जाने की स्पष्ट आवाज सुनने या देखने से इनकार किया।
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आंतरिक हादसे की आशंका: जीआरपी इस बात की भी जांच कर रही है कि कहीं ट्रेन के भीतर ही किसी भारी सामान (जैसे ट्रॉली बैग या लोहे का सामान) के गिरने से तो पैर में चोट नहीं लगी, या फिर ट्रेन से उतरते-चढ़ते समय कोई हादसा तो नहीं हुआ जिसे छुपाने के लिए पथराव की कहानी बनाई जा रही हो।
जीआरपी अधिकारियों का बयान और आगे की कार्रवाई
जीआरपी के वरिष्ठ अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए हर पहलू की जांच की जा रही है। जीआरपी का कहना है:
“यात्री के घायल होने और पैर में फ्रैक्चर होने की पुष्टि हुई है। हालांकि, पथराव की बात अभी पूरी तरह से संदिग्ध है और हमारे गले नहीं उतर रही है। ट्रेन जिस क्षेत्र से गुजर रही थी, वहां के आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। इसके अलावा जीआरपी और आरपीएफ (रेलवे सुरक्षा बल) की संयुक्त टीम ट्रैक का भी निरीक्षण कर रही है। जांच से जो भी सत्यता और तथ्य निकलकर सामने आएंगे, उसी आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।”
रेलवे में ट्रेनों पर पथराव एक गंभीर चुनौती
यद्यपि इस विशेष मामले में जीआरपी को संदेह है, लेकिन यह सच है कि भारतीय रेलवे के विभिन्न रूटों पर चलती ट्रेनों पर पथराव की घटनाएं सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी सिरदर्दी बनी हुई हैं। वंदे भारत जैसी प्रीमियम ट्रेनों से लेकर आम एक्सप्रेस और पैसेंजर ट्रेनों तक पर शरारती तत्वों द्वारा पत्थरबाजी के मामले दर्ज होते रहते हैं।
रेल प्रशासन और जीआरपी समय-समय पर ट्रैक किनारे बसे गांवों और बस्तियों में जागरूकता अभियान चलाती है। साथ ही, ट्रेन पर पत्थरबाजी करने वालों के खिलाफ रेलवे अधिनियम के तहत गैर-जमानती धाराओं में कार्रवाई का प्रावधान है।
फिलहाल बरेली में हुए इस हादसे के बाद पीड़ित का इलाज चल रहा है। अब सभी की निगाहें जीआरपी की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। अगर जांच में बाहरी पथराव सिद्ध होता है, तो यह रेलवे सुरक्षा व्यवस्था की चूक होगी। वहीं, अगर जीआरपी की आशंका सही साबित होती है, तो घटना की असली वजह जल्द ही सामने आ जाएगी। रेलवे पुलिस का कहना है कि जल्द ही निष्पक्ष जांच पूरी कर मामले का खुलासा कर दिया जाएगा।
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,
सीनियर एडिटर (Allrights Magazine)

