जजों की रिटायरमेंट उम्र पर आदेश
सर्वोच्च न्यायालय का बड़ा निर्देश: न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु 61 वर्ष करने पर विचार करें राज्य और केंद्र शासित प्रदेश
देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अधीनस्थ न्यायपालिका के अधिकारियों की कार्यकुशलता और अनुभव का लाभ उठाने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि वे न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति की वर्तमान आयु को 60 वर्ष से बढ़ाकर 61 वर्ष करने पर गंभीरता से विचार करें।
तीन जजों की पीठ ने दिया निर्देश
यह महत्वपूर्ण निर्देश मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायूमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायूमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने दिया।
पीठ पूरे देश में जिला स्तर के न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु को 60 से बढ़ाकर 62 वर्ष करने की समान मांग वाली एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
उच्च न्यायालयों के परामर्श से लिया जाएगा निर्णय
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अपने-अपने अधिकार क्षेत्र के तहत आने वाले संबंधित उच्च न्यायालयों (High Courts) के साथ अनिवार्य परामर्श करके इस विषय पर अंतिम निर्णय लेना होगा।
न्यायपालिका में सेवानिवृत्ति आयु का वर्तमान ढांचा
भारत में न्यायिक सेवाओं के विभिन्न स्तरों पर सेवानिवृत्ति की आयु सीमा अलग-अलग तय है:
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जिला/अधीनस्थ न्यायिक अधिकारी: वर्तमान में 60 वर्ष।
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उच्च न्यायालय (High Court) के न्यायाधीश: 62 वर्ष।
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सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के न्यायाधीश: 65 वर्ष।
यदि राज्य सरकारें और उच्च न्यायालय सुप्रीम कोर्ट के इस निर्देश पर अमल करते हैं, तो देश भर के जिला एवं अधीनस्थ न्यायालयों में कार्यरत हजारों न्यायिक अधिकारियों को 1 वर्ष का अतिरिक्त सेवाकाल प्राप्त होगा।
रिपोर्ट: सोनू कुमार पत्रकार
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,
सीनियर एडिटर
(Allrights Magazine)

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