सत्य निकेतन हादसा: विपक्ष का सरकार पर तीखा प्रहार
सत्य निकेतन हादसा: विपक्ष ने भाजपा सरकार पर साधा निशाना, ‘सुरक्षा देने में नाकाम, आवाज दबाने में पूरी ताकत’
नई दिल्ली: दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में पेइंग गेस्ट (PG) इमारत ढहने से हुई छात्रों और मजदूरों की मौत के मामले में सियासत गरमा गई है। विपक्ष ने केंद्र और स्थानीय प्रशासन की भूमिका पर कड़े सवाल उठाते हुए सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर प्रशासनिक नाकामी और लीपापोती का गंभीर आरोप लगाया है। विपक्षी दलों का कहना है कि सरकार छात्रों को सुरक्षित हॉस्टल सुविधा प्रदान करने में पूरी तरह विफल साबित हुई है और अब हादसे के सच को दबाने की कोशिश की जा रही है।
‘सुरक्षा देने में विफल, अब सच दबाने की कोशिश’: विपक्ष का हमला विपक्ष ने जारी अपने तीखे बयान में प्रशासनिक तंत्र की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए हैं:
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छात्रों की सुरक्षा से खिलवाड़: देश के कोने-कोने से दिल्ली में उच्च शिक्षा के लिए आने वाले युवाओं को सुरक्षित और मानक-युक्त हॉस्टल या पीजी मुहैया कराना सरकार की जिम्मेदारी थी, लेकिन अवैध इमारतों और मानक-विहीन पीजी हॉस्टलों को संरक्षण दिया गया।
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सूचना छिपाने का आरोप: विपक्ष का आरोप है कि हादसे की भयावहता, जमीनी हकीकत और प्रशासनिक कमियों को दबाने के लिए सूचना तंत्र पर दबाव बनाया जा रहा है ताकि सही मदद और सच बाहर न आ सके।
हादसे के बाद गहराया आक्रोश और कानूनी शिकंजा सत्य निकेतन में हुए इस दर्दनाक हादसे में 7 लोगों की जान चली गई, जिनमें कई होनहार छात्र भी शामिल थे:
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मालिकों की गिरफ्तारी: पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए पीजी मालिक हरिराम गुप्ता, उनकी पत्नी और बेटे को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया है।
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अदालत और जनता का दबाव: दिल्ली उच्च न्यायालय ने भी हादसे पर कड़ा रुख अपनाते हुए नागरिक निकायों और नगर निगम की जवाबदेही तय करने तथा शहर भर के अवैध व जर्जर पीजी की जांच के निर्देश दिए हैं।
छात्र संगठनों और विपक्षी नेताओं ने पीड़ित परिवारों के लिए मुआवजे, घायलों के उचित इलाज और अवैध रूप से चल रहे पीजी सिंडिकेट में शामिल अधिकारियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,
सीनियर एडिटर (Allrights Magazine)

