CEC ज्ञानेश कुमार पर विपक्ष का बड़ा हमला: दामाद की रिपोर्ट से शिकायतें खारिज करने पर उठे सवाल
“मुख्य चुनाव आयुक्त पर विपक्षी दलों का बड़ा हमला: दामाद की रिपोर्ट से शिकायतों को खारिज करने और ‘हितों के टकराव’ के लगे गंभीर आरोप”
नई दिल्ली: देश में निष्पक्ष और पारदर्शी चुनावी प्रक्रिया को लेकर एक बार फिर बड़ा प्रशासनिक व राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। विपक्षी दलों (INDIA ब्लॉक), सामाजिक संगठनों और मीडिया रिपोर्ट्स ने भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली और उनके फैसलों में ‘हितों के टकराव’ (Conflict of Interest) को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।
विपक्ष ने आरोप लगाया है कि चुनाव आयोग ने मताधिकार से वंचित किए गए नागरिकों और ‘वोट चोरी’ से जुड़ी शिकायतों को निपटाने में निष्पक्षता के संवैधानिक सिद्धांतों की अनदेखी की है।
1. दामाद की रिपोर्ट और ‘हितों के टकराव’ का बड़ा मामला
विपक्ष और विभिन्न रिपोर्ट्स द्वारा उठाए गए मुख्य सवालों में संभल (उत्तर प्रदेश) लोकसभा चुनाव के दौरान घटी घटनाएं प्रमुख हैं:
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संभल में वोट रोके जाने के आरोप: चुनाव के दौरान संभल लोकसभा क्षेत्र में कई मतदाताओं (विशेषकर अल्पसंख्यक समुदाय के वोटरों) को पुलिस व प्रशासन द्वारा मतदान केंद्रों से भगाने और वोट डालने से रोकने की शिकायतें आई थीं।
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दामाद मनीष बंसल की भूमिका: उस समय संभल के जिला मजिस्ट्रेट (DM) व रिटर्न अधिकारी (RO) मनीष बंसल थे, जो ज्ञानेश कुमार के दामाद हैं।
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रिपोर्ट पर मुहर और शिकायतों की ख़ारिजगी: संभल विवाद में रिटर्न अधिकारी मनीष बंसल ने एक रिपोर्ट बनाकर चुनाव आयोग को सौंपी, जिसमें वोटरों से बदसलूकी और वोट रोकने के आरोपों को “भ्रामक और असत्य” बताया गया। आयोग ने इस रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए शिकायतों को खारिज कर दिया।
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संवैधानिक सवाल: आलोचकों और कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि मुख्य चुनाव आयुक्त को अपने दामाद की रिपोर्ट की समीक्षा और उस पर फैसला लेने की प्रक्रिया से स्वयं को अलग (Recuse) कर लेना चाहिए था, परंतु ऐसा न करके ‘हितों के टकराव’ का उल्लंघन किया गया।
2. बेटी और दामाद को ‘VIP पोस्टिंग’ और प्रशासनिक प्रभाव के आरोप
ज्ञानेश कुमार के परिवार के सदस्यों के प्रशासनिक पदों पर आसीन होने को लेकर भी राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हैं:
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पुत्री व दामाद की पोस्टिंग: ज्ञानेश कुमार की पुत्री मेधा रूपम (IAS 2014 बैच) वर्तमान में उत्तर प्रदेश के हाई-प्रोफाइल जिले गौतम बुद्ध नगर (नोएडा) की जिलाधिकारी (DM) हैं। वहीं उनके पति मनीष बंसल (IAS 2014 बैच) भी राज्य के महत्वपूर्ण जिले के डीएम रहे हैं।
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VIP ट्रीटमेंट के आरोप: विपक्षी दलों का आरोप है कि इतने कम अनुभव और सेवा अवधि के बावजूद इतने महत्वपूर्ण जिलों का प्रभार मिलना प्रशासनिक गलियारों में पारिवारिक प्रभाव और वीआईपी तवज्जो की ओर इशारा करता है।
3. ‘वोट चोरी’ का आरोप और चुनाव आयोग के आंतरिक मतभेद
हाल ही में मतदाता सूचियों में बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने और SIR/SVR प्रक्रिया को लेकर भी आयोग विवादों में घिरा हुआ है:
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विपक्ष का जंतर-मंतर प्रदर्शन: राहुल गांधी सहित ‘इंडिया’ गठबंधन के नेताओं ने ज्ञानेश कुमार पर सीधे ‘वोट चोरी’ को शह देने का आरोप लगाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की मांग की है और देशव्यापी विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी है।
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चुनाव आयुक्तों की आपत्ति: मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चुनाव आयोग के भीतर ही अन्य चुनाव आयुक्तों ने मतदाता सूचियों के प्रबंधन, फॉर्म-6 में अनधिकृत बदलावों और डेटा के केंद्रीयकरण को लेकर लिखित आपत्तियां दर्ज कराई थीं।
चुनाव आयोग और सरकार का पक्ष
चुनाव आयोग और ज्ञानेश कुमार ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें “मनगढ़ंत और निराधार” करार दिया है।
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आयोग की सफाई: आयोग का कहना है कि मतदाता सूची संशोधन और शिकायतों का निवारण पूरी तरह से वैधानिक नियमों, पारदर्शिता और स्थापित कानूनी प्रक्रियाओं के तहत किया गया है।
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योग्यता का तर्क: सरकार व आयोग समर्थकों का कहना है कि ज्ञानेश कुमार के परिवार के सदस्य संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की कठिन परीक्षा उत्तीर्ण कर आईएएस अधिकारी बने हैं और उनकी पदस्थापना राज्य सरकार के कैडर आवंटन नियमों के अनुसार ही हुई है।
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