**निवेदिता बसु बनीं स्क्वैश खिलाड़ी**
निवेदिता बसु: 40 की उम्र के बाद स्क्वैश में रचा इतिहास
मुंबई (अनिल बेदाग)। टेलीविजन और डिजिटल मनोरंजन जगत में दो दशक से अधिक समय तक पहचान बनाने वाली जानी-मानी निर्माता व निर्देशक निवेदिता बसु अब एक नई भूमिका में अपनी चमक बिखेर रही हैं। 40 वर्ष की आयु के बाद गंभीरता से स्क्वैश को अपनाने वाली निवेदिता आज मास्टर्स सर्किट में महाराष्ट्र का प्रतिनिधित्व कर रही हैं और अपनी कैटेगरी में सीडेड खिलाड़ी बन चुकी हैं।
खेलों से भरा पारिवारिक पृष्ठभूमि
खेल निवेदिता के लिए बचपन से ही जीवन का अभिन्न हिस्सा रहे हैं:
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माता-पिता की प्रेरणा: उनके पिता टेनिस और स्क्वैश खेलते थे, जबकि मां राष्ट्रीय स्तर की टेबल टेनिस और हैंडबॉल खिलाड़ी रही हैं।
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पारिवारिक प्रभाव: अपनी इस यात्रा पर निवेदिता सहजता से कहती हैं, “फल पेड़ से ज्यादा दूर नहीं गिरता।”
मनोरंजन जगत से खेल के मैदान तक
बालाजी टेलीफिल्म्स के बैनर तले ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’, ‘कहानी घर घर की’ और ‘कसौटी जिंदगी की’ जैसे चर्चित धारावाहिकों से जुड़ी रहीं निवेदिता ने बाद में नेतृत्व और उद्यमिता के क्षेत्र में कदम रखा। अब स्क्वैश उनके लिए केवल फिटनेस का साधन नहीं, बल्कि लक्ष्य और प्रतिस्पर्धा का माध्यम बन चुका है।
कोलकाता में आयोजित नेशनल मास्टर्स स्क्वैश चैंपियनशिप के सेमीफाइनल तक पहुंचकर उन्होंने अपनी बेहतरीन क्षमता का प्रदर्शन किया। उनका मानना है, “मैं यह नहीं बदल सकती कि मैंने शुरुआत कब की, लेकिन अब इसे कितनी गंभीरता से लेती हूं, यह पूरी तरह से मेरे हाथ में है।”
‘वीमेन एंड रैकेट स्पोर्ट्स’ पहल
महिलाओं को खेलों से जोड़ने और उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए निवेदिता ने ‘वीमेन एंड रैकेट स्पोर्ट्स’ नाम से एक विशेष पहल शुरू की है।
तमाम महिलाओं के लिए उनका संदेश बेहद साफ और प्रेरणादायी है—“40 के बाद नई शुरुआत करना देर होना नहीं है, बल्कि खुद को फिर से खोजने और गढ़ने का एक शानदार मौका है।”
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,
सीनियर एडिटर (Allrights Magazine)

