नीट बैन: डीएमके का लोकसभा में नोटिस

नीट (NEET) पर तत्काल रोक लगाए केंद्र: डीएमके ने लोकसभा में दिया स्थगन प्रस्ताव, जंतर-मंतर हिंसा की जांच की भी उठाई मांग

विशेष राष्ट्रीय एवं संसदीय ब्यूरो: नई दिल्ली

तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) ने देश भर में आयोजित होने वाली मेडिकल प्रवेश परीक्षा ‘नीट’ (NEET) को तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित करने की मांग उठाई है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और संसदीय दल के नेता टी.आर. बालू ने सोमवार को लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव (Adjournment Motion) का नोटिस दिया है।

डीएमके ने संसद के जारी मानसून सत्र के दौरान नीट परीक्षा पर स्थायी रूप से रोक लगाने और हाल ही में दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुई हिंसा की उच्च स्तरीय जांच कराने की पुरजोर वकालत की है।

पेपर लीक विवाद और शिक्षा मंत्री का इस्तीफा

मई में आयोजित नीट-यूजी (NEET-UG) परीक्षा में हुई धांधली और पेपर लीक के आरोपों के बाद देश भर में छात्रों का गुस्सा चरम पर पहुंच गया था।

  1. छात्रों का व्यापक आंदोलन: पेपर लीक के विरोध में देश भर के विद्यार्थियों और युवा संगठनों ने एक महीने से अधिक समय तक सड़कों पर उतरकर कड़ा विरोध दर्ज कराया।

  2. धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा: छात्रों के भारी दबाव और लगातार बढ़ते राजनीतिक गतिरोध के बाद तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था।

  3. प्रल्हाद जोशी बने नए शिक्षा मंत्री: धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने प्रल्हाद जोशी को देश का नया केंद्रीय शिक्षा मंत्री नियुक्त किया है।

जंतर-मंतर पर पुलिस कार्रवाई की जांच की मांग

स्थगन प्रस्ताव के नोटिस में डीएमके सांसद टी.आर. बालू ने नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण ढंग से आंदोलन कर रहे मासूम छात्रों और युवाओं पर पुलिस द्वारा किए गए कथित बल प्रयोग और हथियारों के अंधाधुंध इस्तेमाल का मुद्दा भी जोर-शोर से उठाया।

डीएमके ने केंद्र सरकार से मांग की है कि जंतर-मंतर पर हुए लाठीचार्ज और हिंसा के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त जांच बैठाई जाए। पार्टी का स्पष्ट कहना है कि नीट जैसी केंद्रीकृत परीक्षाएं राज्यों के अधिकारों का हनन करती हैं और गरीब व ग्रामीण पृष्ठभूमि के मेधावी छात्रों के सपनों को कुचलने का काम कर रही हैं, इसलिए इसे तुरंत समाप्त किया जाना चाहिए।

राष्ट्रीय एवं संसदीय ब्यूरो: नई दिल्ली

सीनियर एडिटर गोपाल चन्द्र अग्रवाल,

ALL rights magazine (डिजिटल न्यूज़ नेटवर्क)

SC की टिप्पणी: शांतिपूर्ण प्रदर्शन अधिकार!

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