सत्या निकेतन के बाद जागी MCD: लक्ष्मी नगर में रोक
सत्या निकेतन हादसे के बाद जागी MCD और पुलिस: लक्ष्मी नगर के सुभाष चौक स्थित चाणक्य कॉम्प्लेक्स (B-10, 11) में रोका गया चतुर्थ मंजिल का निर्माण
नई दिल्ली: सत्या निकेतन में हुए दर्दनाक पीजी हादसे और मौतों के बाद आखिरकार दिल्ली नगर निगम (MCD) और स्थानीय पुलिस महकमे की नींद टूटती दिख रही है। लगातार उठ रहे जनआक्रोश और मीडिया रिपोर्टिंग के बाद प्रशासन ने लक्ष्मी नगर के सुभाष चौक स्थित चाणक्य कॉम्प्लेक्स (B-10, 11) में चल रहे अवैध और जोखिमभरे निर्माण कार्य पर हस्तक्षेप करते हुए चौथी मंजिल (4th Floor) के निर्माण को रुकवा दिया है।
हालांकि, इस कार्रवाई के बाद क्षेत्रवासियों और जागरूक नागरिकों का वही तीखा सवाल फिर हवा में तैर रहा है— ‘आखिर हर बार किसी मासूम की बलि चढ़ने और बड़े हादसे के बाद ही क्यों जागता है प्रशासन?’
चाणक्य कॉम्प्लेक्स (B-10, 11): बेसमेंट से चौथी मंजिल तक नियमों की धज्जियां
सुभाष चौक के अत्यंत व्यस्त और घनी आबादी वाले इलाके में स्थित इस कॉम्प्लेक्स में सुरक्षा मानकों को पूरी तरह ताक पर रखकर निर्माण किया जा रहा था:
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कमर्शियल बेसमेंट का असुरक्षित जाल: इमारत के बेसमेंट (Basement) में बिना किसी मजबूत स्ट्रक्चरल सेफ्टी जांच और सॉइल टेस्टिंग के दुकानें और कमर्शियल ऑफिस संचालित किए जा रहे हैं।
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ऊपरी मंजिलों पर दफ्तर और अवैध विस्तार: बाकी की निचली और ऊपरी मंजिलों को भी कमर्शियल ऑफिसों में तब्दील कर दिया गया है। इसके बावजूद, व्यावसायिक लालच में इमारत की लोड-बेयरिंग क्षमता को नजरअंदाज करते हुए चौथी मंजिल का अवैध निर्माण धड़ल्ले से कराया जा रहा था।
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फायर सेफ्टी और निकास का अभाव: तंग मोड़ और अत्यधिक आवाजाही वाले सुभाष चौक पर इस तरह का अवैध निर्माण आपात स्थिति में भारी तबाही का कारण बन सकता था।
‘हादसा हो तब कार्रवाई, पहले क्यों चुप्पी?’ — प्रशासनिक साठगांठ पर सवाल
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि चाणक्य कॉम्प्लेक्स में बेसमेंट से लेकर तीसरी-चौथी मंजिल तक का काम कई महीनों से जारी था, लेकिन जब तक सत्या निकेतन का हादसा नहीं हुआ और ऊपर से सख्ती के आदेश नहीं आए, तब तक न तो नगर निगम के जेई-एई को यह अवैध निर्माण दिखा और न ही बीट पुलिस अधिकारी को।
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‘वेट एंड वॉच’ की नीति: आरोप है कि जब इमारत बन रही होती है, तब अधिकारी रिश्वत और सांठगांठ के चलते आंखें मूंद लेते हैं।
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दिखावे की रोक: हादसे के तुरंत बाद जब मीडिया और अदालत का रुख सख्त होता है, तो जाकर काम रुकवाने का नाटक किया जाता है।
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मामला शांत होते ही फिर निर्माण: जनता का अंदेशा है कि जैसे ही सत्या निकेतन का मुद्दा ठंडा होगा, हफ्ता और रिश्वत का खेल दोबारा शुरू होगा और इस चौथी मंजिल का काम फिर से पूरा करा दिया जाएगा।
‘ऑल राइट्स मैगजीन’ का सीधा सवाल
चाहे लक्ष्मी नगर का ‘शर्मा पीजी’ हो, मेहरौली की 6-6 मंजिला इमारतें हों, या अब सुभाष चौक का ‘चाणक्य कॉम्प्लेक्स’— ‘ऑल राइट्स मैगजीन’ लगातार इस बात को प्रमुखता से उठा रही है कि महज ‘काम रुकवाना’ (Work Stop) कोई समाधान नहीं है।
जब तक चाणक्य कॉम्प्लेक्स (B-10, 11) जैसे अवैध ढांचों को पूरी तरह ध्वस्त कर सील नहीं किया जाता और इसे बनने देने वाले जिम्मेदार निगम इंजीनियरों व पुलिस बीट अफसरों पर एफआईआर दर्ज नहीं होती, तब तक दिल्ली के नागरिक हादसों के मुहाने पर खड़े रहने को मजबूर रहेंगे।
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,
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