पीएम मोदी ने पुतिन को भेंट किया ‘तिरुक्कुरल’
BRICS 2026: पीएम मोदी ने रूसी राष्ट्रपति पुतिन को भेंट किया तमिल महाग्रंथ ‘तिरुक्कुरल’ का रूसी अनुवाद; कूटनीति में दिखी भारतीय संस्कृति की झलक
नई दिल्ली: 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन की शुरुआत के साथ ही भारत और रूस की गहरी और अटूट दोस्ती में एक और ऐतिहासिक सांस्कृतिक अध्याय जुड़ गया है। नई दिल्ली में आयोजित द्विपक्षीय बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का गर्मजोशी से स्वागत किया और उन्हें तमिल साहित्य व ज्ञान का अमूल्य प्रतीक ‘तिरुक्कुरल’ (Thirukkural) का विशेष रूसी अनुवाद (Russian Translation) उपहार स्वरूप भेंट किया।
‘तिरुक्कुरल’: नीति, नैतिकता और सुशासन का कालजयी संदेश
संत तिरुवल्लुवर द्वारा रचित ‘तिरुक्कुरल’ केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन दर्शन, नैतिकता और शासन कला का कालजयी संग्रह है:
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सद्भाव और कूटनीतिक संदेश: इस महान ग्रंथ में धर्म (सदाचार), अर्थ (राजनीति व सुशासन) और काम (प्रेम व पारिवारिक जीवन) का अद्भुत वर्णन है। वैश्विक तनाव और संघर्ष के मौजूदा दौर में प्रधानमंत्री द्वारा राष्ट्रपति पुतिन को यह उपहार देना शांति, न्यायसंगत शासन और नैतिक मूल्यों का एक सशक्त कूटनीतिक संदेश है।
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वैश्विक पटल पर तमिल संस्कृति का गौरव: भारत की प्राचीन और समृद्ध तमिल भाषा की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक नेताओं के समक्ष पेश कर प्रधानमंत्री मोदी ने ‘सॉफ्ट पावर’ (Soft Power) कूटनीति की एक नई मिसाल कायम की है।
ब्रिक्स 2026: दोस्ती और वैश्विक मुद्दों पर मजबूत मंथन
‘तिरुक्कुरल’ की इस सांस्कृतिक भेंट के साथ ही दोनों शीर्ष नेताओं के बीच वैश्विक और द्विपक्षीय मुद्दों पर अत्यंत सार्थक चर्चा हुई:
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अटूट भारत-रूस संबंध: बैठक के दौरान दोनों देशों के प्रमुखों ने रक्षा, व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई।
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वैश्विक शांति पर चर्चा: पीएम मोदी ने दोहराया कि भारत हमेशा बातचीत और कूटनीति के माध्यम से समस्याओं के समाधान का समर्थक रहा है।
अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का यह सांस्कृतिक और वैचारिक नेतृत्व यह साबित करता है कि देश की कूटनीति केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि सदियों पुराने ज्ञान और मानवीय मूल्यों को भी दुनिया के सामने मजबूती से रखती है।
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,
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