कर्नाटक कांग्रेस विधायक का बयान: ‘काम के बाद रिश्वत देना जायज’
कर्नाटक में कांग्रेस विधायक के ‘रिश्वत’ वाले बयान पर मचा राजनीतिक बवाल: शिवलिंगे गौड़ा बोले- “काम होने के बाद अधिकारियों को ‘आदर’ देना सही”
बेंगलुरु/नई दिल्ली: कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ विधायक के.एम. शिवलिंगे गौड़ा (K.M. Shivalinge Gowda) के एक विवादित बयान ने राज्य और राष्ट्रीय राजनीति में बड़ा सियासी तूफान खड़ा कर दिया है। एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान विधायक द्वारा सरकारी अधिकारियों को काम के बदले पैसे या ‘आदर’ दिए जाने को कथित तौर पर जायज ठहराए जाने के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कांग्रेस सरकार और उसकी प्रशासनिक नीतियों पर चौतरफा हमला बोल दिया है।
विपक्ष ने इस बयान को भ्रष्टाचार को संस्थागत रूप (Institutionalised Corruption) देने की कोशिश करार देते हुए कांग्रेस के सुशासन के दावों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
क्या है पूरा विवाद? क्या बोले कांग्रेस विधायक?
सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो और बयानों के बाद विवाद उस समय गहरा गया जब विधायक के.एम. शिवलिंगे गौड़ा ने अधिकारियों द्वारा काम पूरा किए जाने के बाद लेनदेन को लेकर अपनी राय रखी:
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विवादित बयान: कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा, “अगर अधिकारियों द्वारा काम पूरा कर दिया जाता है, तो दिया जाने वाला पैसा (रिश्वत) जायज है।”
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सफाई में भी विवाद: बयान पर विवाद बढ़ने के बाद जब उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया, तो उन्होंने बात संभालते हुए कहा, “काम पूरा होने के बाद, नागरिकों को अधिकारियों को उनका ‘आदर’ (Respect) देना चाहिए।”
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विपक्ष का तीखा हमला: भाजपा और मुख्य विपक्षी दलों ने इस बयान पर कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा कि सरकारी अधिकारियों का यह नैतिक और कानूनी कर्तव्य है कि वे जनता का काम करें। इसके लिए नागरिकों से अतिरिक्त ‘आदर’ या रिश्वत की अपेक्षा करना सीधे तौर पर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देना है।
“भ्रष्टाचार का संस्थागत मॉडल”: विपक्ष ने बोला हमला
कर्नाटक में सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता और भ्रष्टाचार के मुद्दों को लेकर विपक्ष ने कांग्रेस नेतृत्व से जवाब मांगा है:
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‘सुशासन’ के दावों पर सवाल: विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि कांग्रेस शासन के तहत अधिकारियों का काम केवल वेतन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जनता से खुलेआम अतिरिक्त वसूली को ‘धर्म’ या ‘आदर’ का नाम दिया जा रहा है।
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प्रशासनिक शुचिता की मांग: राज्य के नागरिकों और व्यापारिक संगठनों ने भी चिंता जताते हुए कहा है कि इस तरह के बयानों से निचले स्तर पर भ्रष्टाचार और लालफीताशाही को शह मिलती है।
‘ऑल राइट्स मैगजीन’ सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता, ईमानदारी और जवाबदेही का समर्थन करती है तथा यह मानती है कि नागरिकों को बिना किसी अतिरिक्त वित्तीय या अनुचित दबाव के सुलभ सरकारी सेवाएं मिलना उनका संवैधानिक अधिकार है।
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,
सीनियर एडिटर (Allrights Magazine)
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