पंजाब ने AAP पर भरोसा किया, भगवंत मान पर भरोसा किया। वादा था-नशा मिटा देंगे।
पंजाब ने AAP पर भरोसा किया, भगवंत मान पर भरोसा किया। वादा था – नशा मिटा देंगे।
मैं पूछता हूं, पंजाब के किस कोने से आपने नशा मिटाया?
पंजाब को ऐसा मुख्यमंत्री चाहिए जो उसका दर्द समझे, नशे के खिलाफ पूरी ताकत से लड़े और युवाओं का भविष्य बचाए।
भगवंत मान जी, सवाल पंजाब की एक पूरी पीढ़ी का है। जवाब दीजिए।
पंजाब में नशा (Drugs Issue) एक गंभीर और दीर्घकालिक सामाजिक व राजनीतिक मुद्दा रहा है। राज्य में नशे की समस्या और सरकार के कदमों को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों, प्रशासन और जनता के अलग-अलग दृष्टिकोण हैं:
- राज्य सरकार और समर्थकों का पक्ष
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सख्त कार्रवाई और गिरफ्तारियां: पंजाब सरकार और पुलिस प्रशासन का दावा है कि ‘वार अगेंस्ट ड्रग्स’ (War Against Drugs) अभियान के तहत हजारों तस्करों और पेडलर्स को गिरफ्तार किया गया है तथा बड़ी मात्रा में नशीले पदार्थ जब्त किए गए हैं।
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पुनर्वास (Rehabilitation): सरकार का कहना है कि वे नशे की लत से पीड़ित युवाओं के इलाज के लिए ओओएटी (OOAT) क्लिनिक और नशा मुक्ति केंद्रों का विस्तार कर रहे हैं, ताकि उन्हें मुख्यधारा में वापस लाया जा सके।
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अंतरराष्ट्रीय सीमा पर निगरानी: सीमा पार (ड्रोन) से होने वाली नशे की तस्करी को रोकने के लिए बीएसएफ (BSF) और पंजाब पुलिस द्वारा संयुक्त अभियान चलाए जा रहे हैं।
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विपक्ष और आलोचकों का पक्ष
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जमीनी स्तर पर प्रभाव कम: विपक्षी दलों (कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल, बीजेपी) का आरोप है कि आम आदमी पार्टी और भगवंत मान सरकार ने चुनाव से पहले जितने बड़े दावे किए थे, उस गति से जमीनी स्तर पर नशा खत्म नहीं हुआ है।
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युवाओं और परिवारों का दर्द: आलोचकों के अनुसार, आज भी कई गांवों और शहरों में नशे की उपलब्धता और इसके कारण युवाओं की जान जाने की खबरें आ रही हैं।
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बड़े तस्करों पर कार्रवाई की मांग: विपक्ष का यह भी कहना है कि छोटी-मोटी गिरफ्तारियों के बजाय नशे की सप्लाई चेन के बड़े आकाओं (Kingpins) पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।
पंजाब में नशे का उन्मूलन एक जटिल चुनौती है, जिसके लिए प्रशासनिक सख्ती, सीमा सुरक्षा, सामाजिक जागरूकता और पुनर्वास की दिशा में निरंतर मजबूत कदमों की आवश्यकता है।
