AAP सांसदों की सदस्यता पर खतरा?

आम आदमी पार्टी में बड़ी बगावत: क्या जाएगी राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल की सदस्यता?

नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (AAP) के लिए 24 अप्रैल 2026 का दिन एक बड़े राजनीतिक भूचाल के रूप में सामने आया है। पार्टी के दिग्गज नेता और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल सहित कुल 7 सांसदों ने ‘आप’ का साथ छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया है। इस घटनाक्रम के बाद अब सबसे बड़ा सवाल इन सांसदों की राज्यसभा सदस्यता को लेकर उठ रहा है।



पार्टी ने की सदस्यता रद्द करने की मांग

सांसदों के इस कदम से बौखलाई आम आदमी पार्टी ने आक्रामक रुख अपना लिया है:

  • संजय सिंह का पत्र: राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने स्पष्ट किया है कि वे राज्यसभा सभापति को पत्र लिखकर इन सांसदों को अयोग्य घोषित करने (Disqualification) की मांग करेंगे।

  • तर्क: पार्टी का कहना है कि दूसरी पार्टी में शामिल होना स्वेच्छा से अपनी मूल पार्टी की सदस्यता छोड़ने के समान है, जो दल-बदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) के तहत आता है।

  • मनीष सिसोदिया की बैठक: गुजरात दौरे से लौटते ही मनीष सिसोदिया ने अरविंद केजरीवाल के आवास पर लंबी बैठक की, जिसमें भविष्य की कानूनी और राजनीतिक रणनीति पर चर्चा हुई।

क्या कहता है कानून? (सदस्यता बचेगी या जाएगी)

विशेषज्ञों और बागी सांसदों के अनुसार, उनकी सदस्यता पर खतरा कम है। इसकी मुख्य वजह संविधान की 10वीं अनुसूची के प्रावधान हैं:

  1. दो-तिहाई का नियम: कानून के अनुसार, यदि किसी पार्टी के दो-तिहाई (2/3) विधायक या सांसद एक साथ टूटकर दूसरी पार्टी में विलय (Merge) करते हैं, तो उनकी सदस्यता रद्द नहीं होती।

  2. आप का गणित: राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के कुल 10 सांसद थे। राघव चड्ढा ने दावा किया है कि उनके साथ 7 सांसद (दो-तिहाई से ज्यादा) भाजपा में शामिल हुए हैं।

  3. विलय का दावा: राघव चड्ढा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि वे एक गुट के रूप में भाजपा में ‘विलय’ कर रहे हैं, जो संवैधानिक रूप से वैध है।

इन सांसदों ने छोड़ा साथ

राघव चड्ढा के नेतृत्व में भाजपा में शामिल होने वाले या सहमति देने वाले प्रमुख नामों में शामिल हैं:

  • राघव चड्ढा

  • डॉ. संदीप पाठक

  • अशोक मित्तल

  • स्वाति मालीवाल

  • हरभजन सिंह

  • राजेंद्र गुप्ता

  • विक्रमजीत सिंह साहनी

बगावत की मुख्य वजहें

बागी नेताओं ने आरोप लगाया है कि आम आदमी पार्टी अपने मूल सिद्धांतों और भ्रष्टाचार विरोधी छवि से पूरी तरह भटक चुकी है। राघव चड्ढा ने इसे “सही व्यक्ति का गलत पार्टी में होना” करार दिया। वहीं, पिछले कुछ समय से पार्टी में संगठनात्मक फेरबदल और राघव चड्ढा को ‘डिप्टी लीडर’ के पद से हटाना भी इस विद्रोह की बड़ी वजह मानी जा रही है।

निष्कर्ष: राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चूंकि संख्या बल (7/10) बागी गुट के पास है, इसलिए तकनीकी रूप से उनकी सदस्यता जाना मुश्किल है। हालांकि, ‘आप’ इसे अदालत में चुनौती देने की तैयारी कर रही है।

गोपाल चन्द्र अग्रवाल,

सीनियर एडिटर(Allrights Magazine)

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