IMA रिपोर्ट: 40% डॉक्टरों पर हिंसा

डोंबिवली में डॉक्टरों पर हमले के बाद IMA ने जारी किया देशभर में हुई हिंसा का ब्योरा, WHO ने जताई वैश्विक चिंता

विशेष रिपोर्ट: मुंबई / नई दिल्ली

महाराष्ट्र के डोंबिवली में हाल ही में डॉक्टरों पर हुई हिंसक घटना के बाद इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने सख्त रुख अपनाया है। आईएमए ने देशभर में स्वास्थ्यकर्मियों पर हो रहे हमलों और हिंसा का विस्तृत ब्योरा जारी करते हुए डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

इस बीच, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की हालिया रिपोर्ट ने स्थिति की भयावहता को रेखांकित किया है, जिससे यह स्पष्ट हो गया है कि डॉक्टरों पर हिंसा केवल एक स्थानीय मुद्दा नहीं बल्कि एक गंभीर वैश्विक चिंता बन चुका है।

WHO की रिपोर्ट: 40% स्वास्थ्यकर्मी शारीरिक हिंसा के शिकार

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार:

  • वैश्विक स्थिति: दुनिया भर में लगभग 40% स्वास्थ्यकर्मी अपने सेवाकाल के दौरान किसी न किसी रूप में शारीरिक हिंसा या हमले का सामना करते हैं।

  • मानसिक तनाव: शारीरिक हमलों के अलावा, लगभग 60% से अधिक डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ को मानसिक प्रताड़ना, गाली-गलौज और धमकियों का सामना करना पड़ता है।

  • वैश्विक संकट: डब्ल्यूएचओ ने इसे स्वास्थ्य सेवा प्रणाली के लिए एक बड़ा संकट करार दिया है, जिससे चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

भारत में कड़े कानूनों के बावजूद थम नहीं रहे हमले

डोंबिवली की घटना का हवाला देते हुए आईएमए (IMA) के प्रतिनिधियों ने कहा कि भारत के अधिकांश राज्यों में ‘मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट’ (Medical Protection Act) लागू होने और सख्त कानूनी प्रावधानों के बावजूद डॉक्टरों पर हमले रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं:

  • डोंबिवली घटना का असर: डोंबिवली के अस्पताल में मरीज के परिजनों द्वारा डॉक्टरों के साथ की गई मारपीट के बाद स्थानीय मेडिकल बिरादरी में भारी आक्रोश है।

  • IMA की मांग: आईएमए ने केंद्र सरकार से मांग की है कि डॉक्टरों और स्वास्थ्य सेवा संस्थानों पर हमला करने वालों के खिलाफ गैर-जमानती धाराओं के तहत तत्काल मामला दर्ज किया जाए और उन्हें त्वरित अदालत (Fast-Track Court) के जरिए कड़ी सजा दी जाए।

  • केंद्रीय कानून की आवश्यकता: एसोसिएशन ने देशभर के अस्पतालों में डॉक्टरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक सख्त केंद्रीय संरक्षण कानून (Central Protection Act) जल्द से जल्द लागू करने की अपनी पुरानी मांग को फिर से दोहराया है।

स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा बुरा असर

चिकित्सकों के संगठनों का कहना है कि बार-बार होने वाली हिंसा और असुरक्षा के माहौल के कारण डॉक्टर अब क्रिटिकल (गंभीर) मामलों में जोखिम लेने से कतराने लगे हैं। यदि अस्पतालों में डॉक्टरों को सुरक्षित माहौल नहीं मिला, तो इसका सीधा असर मरीजों के इलाज और आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं पर पड़ेगा।

स्वास्थ्य एवं चिकित्सा ब्यूरो: मुंबई

ऑल राइट्स मैगज़ीन (डिजिटल न्यूज़ नेटवर्क)


  • (गोपाल चन्द्र अग्रवाल,संपादक)

         (एडिटर (Allrights Magazine)


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