साबरमती जेल से कैसे चल रहा है सिंडिकेट? लॉरेंस बिश्नोई के गिरोह की ‘शैडो कैबिनेट’ का खुलासा, विदेशों से हो रहे अंतरराष्ट्रीय ऑपरेशंस संचालित
“जेल की सलाखों के पीछे से कैसे चल रहा है सिंडिकेट? लॉरेंस बिश्नोई गिरोह की ‘शैडो कैबिनेट’ और अंतरराष्ट्रीय ऑपरेशंस का बड़ा खुलासा”
विशेष आपराधिक एवं सामरिक रिपोर्ट (ऑल RIGHTs मैगजीन)
नई दिल्ली / अहमदाबाद: बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर हाल ही में हुए जानलेवा हमले के प्रयास और अन्य हाई-प्रोफाइल वारदातों के बाद एक बार फिर गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का नाम सुर्खियों में है। सबसे बड़ा और गंभीर सवाल यह है कि जब लॉरेंस बिश्नोई खुद गुजरात की उच्च सुरक्षा वाली साबरमती जेल की एक हाई-सिक्योरिटी सेल में बंद है, तो देश और विदेश में उसका आपराधिक साम्राज्य कैसे संचालित हो रहा है? ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की एक विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, इस सिंडिकेट का संचालन एक ‘शैडो कैबिनेट’ (गुप्त कैबिनेट) के जरिए किया जा रहा है, जो विदेशों में बैठकर इसके अंतरराष्ट्रीय ऑपरेशंस को अंजाम दे रही है।
1. कौन चला रहा है ‘शैडो कैबिनेट’? (गिरोह का नया कमांड स्ट्रक्चर)
जांच एजेंसियों और सूत्रों के हवाले से सामने आया है कि लॉरेंस के खास सहयोगियों ने इस नेटवर्क को दो अलग-अलग स्तरों पर बांट रखा है:
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भर्ती और लॉजिस्टिक्स संभालने वाली टीम: इस पहली इकाई में टाइसन बिश्नोई, अनिल पंडित, हरि बॉक्सर, हरमन संधू और हिमांशु सोनीपत जैसे नाम शामिल हैं। इनका मुख्य काम नए गुर्गों की भर्ती करना, उन्हें असाइनमेंट सौंपना, लॉजिस्टिक्स का इंतजाम करना और आपस में स्क्रीनशॉट साझा कर गतिविधियों की निगरानी करना है।
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योजना, फंडिंग और टारगेट चयन इकाई: इस दूसरी टीम में आरजू बिश्नोई, शुभम लोनकर और रणदीप मलिक शामिल हैं, जो रणनीतिक योजना बनाने, फंडिंग जुटाने और वारदातों के लिए टारगेट तय करने का काम संभालते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, कुख्यात गैंगस्टर गोल्डी ढिल्लों भी इसका हिस्सा था, लेकिन एफबीआई के ‘ऑपरेशन हार्डबॉल’ के शुरू होने के बाद वह फिलहाल अंडरग्राउंड हो गया है।
2. डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और छद्म नियंत्रण का खेल
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वर्चुअल कमांड और आधुनिक तकनीक: अमेरिका, कनाडा और यूरोप के सुरक्षित ठिकानों से ऑपरेट कर रहे ये मास्टरमाइंड सिग्नल, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप जैसे एन्क्रिप्टेड ऐप्स के जरिए भारत में बैठे स्थानीय गुर्गों को पल-पल के निर्देश देते हैं। डिजिटल डराने-धमकाने (Cyber Intimidation) और जमीनी स्तर पर वारदातों को अंजाम देने की पूरी निगरानी इसी डिजिटल नेटवर्क से होती है।
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अलग होने का झूठा दिखावा: जांच एजेंसियों का मानना है कि गिरोह के मुख्य सरगना रोहित गोदारा और गोल्डी बराड़ का इस पूरे नेटवर्क पर अभी भी पूरा नियंत्रण है। उन्होंने जांचकर्ताओं और सुरक्षा एजेंसियों को गुमराह करने के लिए लॉरेंस बिश्नोई से अलग होने का एक सुनियोजित और झूठा दिखावा कर रखा है।
3. ‘ऑल RIGHTs मैगजीन’ का दृष्टिकोण: संगठित अपराध पर लगाम और प्रशासनिक चुनौती
जेल की चारदीवारी के भीतर से आपराधिक सिंडिकेट्स का संचालन देश की आंतरिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के लिए एक गंभीर चुनौती है। हालांकि राज्य और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियां (जैसे STF और NIA) लगातार इन नेटवर्क्स को तोड़ने के लिए कड़े कदम उठा रही हैं, लेकिन साइबर स्पेस और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के पार बैठे इन अपराधियों के खिलाफ और अधिक सख्त वैश्विक सहयोग की आवश्यकता है।
‘ऑल RIGHTs मैगजीन’ देश की आंतरिक सुरक्षा, संगठित अपराधों के सफाए और प्रशासनिक कसावट से जुड़ी हर बड़ी खबर पर पैनी नजर रखती है।
