गुजरात: बारिश में बहा नेशनल हाईवे

गुजरात आफत की बारिश: सावरकुंडला-अमरेली नेशनल हाईवे का बड़ा हिस्सा बहा, यातायात पूरी तरह ठप

अमरेली (गुजरात): गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश आफत बनकर बरस रही है। अमरेली जिले से बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचने की एक बड़ी खबर सामने आई है, जहां सावरकुंडला-अमरेली नेशनल हाईवे का एक मुख्य हिस्सा बाढ़ के तेज बहाव में पूरी तरह बह गया। हाईवे के बीचो-बीच एक बड़ा हिस्सा ढह जाने के कारण इस रूट पर वाहनों का आवागमन पूरी तरह से ठप हो गया है और सड़क के दोनों ओर राहगीरों व गाड़ियों की लंबी कतारें लग गई हैं।

उफान पर नदियां, कई गांवों का संपर्क टूटा

पिछले 48 घंटों से जारी भारी बारिश के कारण अमरेली जिले के कई तालुकों में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं:

  • सड़क के बीचों-बीच दरार: स्थानीय नदियों के बढ़े जलस्तर और पानी के प्रचंड दबाव के कारण नेशनल हाईवे का एक बड़ा हिस्सा टूटकर बह गया, जिससे दो प्रमुख क्षेत्रों का संपर्क अचानक कट गया।

  • टापू बने कई गांव: क्षेत्र की नदियां उफान पर होने के कारण बाढ़ का पानी रिहायशी इलाकों में प्रवेश कर गया है। निचले इलाकों में स्थित कई गांवों के चारों तरफ पानी भर जाने के कारण वे पूरी तरह टापू में तब्दील हो चुके हैं।

  • प्रशासन अलर्ट पर: स्थानीय प्रशासन के साथ-साथ आपदा प्रबंधन (SDRF) की टीमों को अलर्ट मोड पर रखा गया है, ताकि प्रभावित क्षेत्रों से लोगों को सुरक्षित निकाला जा सके।

इंफ्रास्ट्रक्चर की गुणवत्ता पर उठे सवाल

सोशल मीडिया पर जैसे ही टूटे हुए नेशनल हाईवे और मलबे की तस्वीरें वायरल हुईं, नागरिकों और सोशल मीडिया क्रिएटर्स ने मानसून के दौरान बुनियादी ढांचे की मजबूती को लेकर तीखे सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि हर साल होने वाली भारी बारिश से निपटने के लिए सड़कों के निर्माण में उच्च गुणवत्ता के मानकों का ध्यान रखा जाना बेहद जरूरी है।

मौसम विभाग (IMD) ने सौराष्ट्र और दक्षिण गुजरात के कई हिस्सों में अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान जताया है। प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि वे बेहद जरूरी होने पर ही यात्रा करें और जलभराव वाले रास्तों, रपटों या कमजोर पुलों को पार करने की कोशिश बिल्कुल न करें। बाढ़ का पानी कम होते ही हाईवे को दुरुस्त करने का काम युद्धस्तर पर शुरू किया जाएगा।

(गोपाल चंद्र अग्रवाल, संपादक)
 (संपादक, ऑलराइट्स मैगज़ीन)

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