गाजियाबाद: AQI 460, दमघोंटू हुई हवा

गाजियाबाद में ‘दमघोंटू’ हुई हवा: AQI 460 के पार, वसुंधरा सबसे प्रदूषित; डॉक्टरों ने जारी की हेल्थ एडवायजरी

गाजियाबाद। दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। गाजियाबाद में वायु प्रदूषण अब ‘खतरनाक’ (Severe) स्तर पर पहुंच गया है। मंगलवार सुबह 8 बजे के आंकड़ों के अनुसार, शहर के सभी सरकारी मॉनिटरिंग स्टेशनों पर प्रदूषण का स्तर ‘गंभीर’ श्रेणी में दर्ज किया गया। धुंध और स्मॉग की चादर ने पूरे शहर को अपनी आगोश में ले लिया है।

वसुंधरा में हालात सबसे खराब, औसत AQI 415 पार

प्रदूषण विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, गाजियाबाद जिले का औसत एक्यूआई (AQI) 415 दर्ज किया गया। सबसे चिंताजनक स्थिति वसुंधरा क्षेत्र की रही, जहां हवा की गुणवत्ता का सूचकांक 460 तक पहुंच गया।

गाजियाबाद के मॉनिटरिंग स्टेशनों का AQI (सुबह 8 बजे)

क्रम मॉनिटरिंग स्टेशन AQI स्तर श्रेणी
1 इंदिरापुरम 412 गंभीर
2 लोनी 401 गंभीर
3 संजय नगर 387 गंभीर
4 वसुंधरा 460 गंभीर

विशेषज्ञों की चेतावनी: घर में रहना ही सुरक्षित

पर्यावरण विशेषज्ञों और डॉक्टरों के अनुसार, हवा का यह स्तर स्वस्थ व्यक्ति को भी बीमार कर सकता है। दमा, हृदय रोगी, बुजुर्गों और बच्चों के लिए यह स्थिति जानलेवा साबित हो सकती है। सामान्य लोगों में भी आंखों में जलन, सांस फूलना, लगातार सिरदर्द और गले में खराश जैसी समस्याएं देखी जा रही हैं।

डॉक्टरों की ‘हेल्थ एडवायजरी’ – क्या करें और क्या न करें?

बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने निम्नलिखित सावधानी बरतने की सलाह दी है:

  • मास्क का अनिवार्य उपयोग: बाहर निकलते समय केवल N95 मास्क का ही प्रयोग करें, साधारण कपड़े का मास्क प्रदूषण से नहीं बचा सकता।

  • आउटडोर एक्टिविटी बंद करें: सुबह की सैर (Morning Walk) और बाहर व्यायाम करने से बचें। घर के अंदर ही योग या कसरत करें।

  • जरूरी होने पर ही निकलें: बिना किसी आवश्यक कार्य के घर से बाहर न जाएं।

  • बच्चों का विशेष ध्यान: स्कूल जाने वाले बच्चों और बुजुर्गों के लिए हवा अधिक हानिकारक है, उन्हें खिड़की-दरवाजे बंद कर सुरक्षित रखने का प्रयास करें।

प्रशासन पर बढ़ा दबाव

प्रदूषण के ‘गंभीर’ स्तर पर पहुंचने के बाद अब प्रशासन पर GRAP-4 जैसे कड़े प्रतिबंधों को सख्ती से लागू करने का दबाव बढ़ गया है। निर्माण कार्यों और भारी वाहनों के प्रवेश पर पहले से ही पाबंदियां लगाई गई हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर असर कम ही दिख रहा है।


रिपोर्ट: विशेष संवाददाता, गाजियाबाद


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