TVK को समर्थन पर कांग्रेस में बवाल

घटिया राजनीतिक अवसरवाद…’, TVK को समर्थन पर कांग्रेस में ही बवाल; मणिशंकर अय्यर ने खोला मोर्चा

चेन्नई/कोलकाता: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद राज्य की राजनीति में आए बड़े उलटफेर ने कांग्रेस के भीतर ही असंतोष की आग भड़का दी है। चुनाव परिणाम आने के बाद कांग्रेस द्वारा अपने पुराने सहयोगी DMK (द्रविड़ मुनेत्र कड़गम) का साथ छोड़कर अभिनेता विजय की पार्टी TVK (तमिलगा वेत्री कझगम) को समर्थन देने के फैसले पर वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर ने कड़ा ऐतराज जताया है।


“राजनीतिक फुटबॉल का सबसे बुरा ‘ओन गोल'”: अय्यर

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर ने पार्टी के इस कदम को ‘अक्षम्य’ और ‘अनैतिक’ करार दिया है। पीटीआई (PTI) से बातचीत और ‘द हिंदू तमिल’ में लिखे अपने लेख में उन्होंने तीखे सवाल उठाए:

  • अवसरवाद की बू: अय्यर ने कहा कि DMK को छोड़कर अचानक TVK से हाथ मिलाना ‘घटिया राजनीतिक अवसरवाद’ है। उन्होंने सवाल किया कि तमिलनाडु में कांग्रेस के इस कदम में ‘चाणक्य’ की जीत हुई है या ‘महात्मा गांधी’ की।

  • BJP को फायदा मिलने का डर: अय्यर ने चेतावनी दी कि यदि इस कदम से राज्य में सांप्रदायिक ताकतों (BJP) की पिछले दरवाजे से एंट्री आसान होती है, तो यह राजनीतिक इतिहास का सबसे बुरा ‘ओन गोल’ साबित होगा।

  • जनादेश का अपमान: उन्होंने तर्क दिया कि कांग्रेस ने जो 5 सीटें जीती हैं, वे DMK के साथ दशकों पुराने गठबंधन की ताकत के कारण मिली हैं। उनके अपने पूर्व संसदीय क्षेत्र ‘मयिलादुथुराई’ में जनता ने TVK के खिलाफ और गठबंधन के पक्ष में वोट दिया था।

गांधी और नेहरू के सिद्धांतों का हवाला

मणिशंकर अय्यर ने पार्टी नेतृत्व को आईना दिखाते हुए कहा:

  • नैतिकता का उल्लंघन: उन्होंने महात्मा गांधी के 1925 के सिद्धांत का जिक्र करते हुए कहा कि स्वराज की सरकार नैतिकता पर आधारित होनी चाहिए। यह फैसला गांधी की ‘सत्य की राजनीति’ के खिलाफ है।

  • नेहरूवादी यथार्थवाद: उन्होंने लिखा कि जवाहरलाल नेहरू भी ऐसे फैसले पर संदेह करते, जिसमें दशकों पुराने और आजमाए हुए साथी (DMK) को छोड़कर उस दल को अपनाया गया जिसे कांग्रेस 4 मई तक ठुकरा रही थी।

TVK ने दी थी कड़ी चुनौती

अय्यर ने याद दिलाया कि इसी TVK ने चुनाव में 23 सीटों पर कांग्रेस को सीधी चुनौती दी थी, जिनमें से कांग्रेस 18 सीटें हार गई। ऐसे में चुनाव के तुरंत बाद पाला बदलना समझ से परे है। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि विजय धर्मनिरपेक्ष हैं, लेकिन एक पुराने साथी को अचानक छोड़ना केवल सत्ता का लोभ दर्शाता है।

इस बगावती सुर ने तमिलनाडु में नई सरकार के गठन और कांग्रेस-DMK के भविष्य के रिश्तों पर बड़े सवालिया निशान लगा दिए हैं।


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