यीडा विदाई समारोह में हंगामा
यीडा में अधिकारी के विदाई समारोह में हंगामा; पूर्व सीईओ पर अभद्र टिप्पणी कर शिष्टाचार भूले सेवानिवृत्त अधिकारी
(ग्रेटर नोएडा): यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) में लंबे समय से अपनी सेवाएं दे रहे एक वरिष्ठ अधिकारी की सेवानिवृत्ति (रिटायरमेंट) पर आयोजित विदाई समारोह अचानक विवादों में घिर गया। विदाई बेला के खुशनुमा माहौल में उस समय असहज स्थिति पैदा हो गई, जब विदा हो रहे अधिकारी अपने भाषण के दौरान प्रशासनिक मर्यादा और शिष्टाचार की सीमाएं लांघ गए। उन्होंने प्राधिकरण के एक पूर्व मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) पर बेहद अशोभनीय टिप्पणी कर दी, जिससे समारोह में सन्नाटा पसर गया।
परंपरा और शिष्टाचार का प्रोटोकॉल
यीडा में आयोजित इस विदाई समारोह में वर्तमान मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) समेत प्राधिकरण के अमूमन सभी छोटे-बड़े अधिकारी और कर्मचारी एकजुट हुए थे। परंपरा के अनुसार, सभी ने विदा हो रहे अधिकारी की कार्यशैली, व्यवहार कुशलता और उनकी प्रशासनिक योग्यता की जमकर तारीफ की।
“देखा जाए तो सरकारी और गैर-सरकारी संस्थानों में विदाई समारोह एक रस्म अदायगी की तरह होता है, जिस पर पूरी तरह से शिष्टाचार का प्रोटोकॉल लागू होता है। यह एक ऐसा भावुक क्षण होता है जब सेवानिवृत्त होने वाले व्यक्ति को बहुत गहराई से न जानने वाले या उसके प्रति मन में विशेष सद्भावना न रखने वाले लोग भी शिष्टाचारवश उसकी शान में कसीदे पढ़ने के लिए विवश होते हैं।”
आमतौर पर सरकारी विभागों में होने वाले विदाई कार्यक्रमों में सहकर्मी किसी उत्साह के कारण कम, बल्कि इस उत्सुकता में ज्यादा जुटते हैं कि देखें विदा होने वाले व्यक्ति के बारे में दूसरे लोग क्या विचार व्यक्त कर रहे हैं। यीडा के इस कार्यक्रम में भी लोग इसी पारंपरिक भावना के साथ एकत्र हुए थे।
भावुक क्षणों में बिगड़े बोल, सहकर्मी हुए असहज
औपचारिकताओं के बाद जब विदा हो रहे अधिकारी को मंच पर अपने विचार व्यक्त करने के लिए आमंत्रित किया गया, तो उन्होंने सबसे पहले सबका आभार जताया। इसके बाद वे अपने सेवाकाल के खट्टे-मीठे अनुभवों को साझा करने लगे। लेकिन, अपने अनुभवों की गहराई में उतरते-उतरते ये अधिकारी अपनी रौ (प्रवाह) में इस कदर बह गए कि विदाई के मूल शिष्टाचार को ही पूरी तरह भूल बैठे।
उन्होंने यीडा के एक पूर्व मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) को निशाने पर लेते हुए उनके खिलाफ बेहद अमर्यादित और तीखी टिप्पणियां कर दीं। एक गरिमामयी मंच से ऐसी अशोभनीय बातें सुनकर समारोह में मौजूद वर्तमान सीईओ और अन्य सभी वरिष्ठ अधिकारी व कर्मचारी बेहद असहज हो गए।
आलोचना के पीछे का विरोधाभास
इस पूरे घटनाक्रम के बाद प्रशासनिक गलियारों में एक दिलचस्प और विरोधाभासी चर्चा भी शुरू हो गई है। प्राधिकरण के सूत्रों के मुताबिक, सेवानिवृत्त हुए इन अधिकारी ने जिस खास वजह या काम को लेकर पूर्व मुख्य कार्यपालक अधिकारी की मंच से इतनी कड़ी आलोचना की थी, मजे की बात यह है कि उसी काम और उसी ढर्रे को खुद के लिए साकार करने (फायदा उठाने) के लिए ये अधिकारी स्वयं पर्दे के पीछे से जी-जान से और जोर-शोर से प्रयासरत हैं।
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,सीनियर एडिटर
(Allrights Magazine)

