कृषि विश्वविद्यालयों में किसान-केंद्रित शोध पर जोर
‘डिग्री नहीं, दक्षता पर दें जोर’: कृषि विश्वविद्यालयों को किसान-केंद्रित अनुसंधान की आवश्यकता
नई दिल्ली: देश के कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाने और अन्नदाताओं की आय में वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए कृषि विश्वविद्यालयों की शोध प्रणाली में क्रांतिकारी बदलाव की आवश्यकता रेखांकित की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान समय में हमारे कृषि संस्थानों को पारंपरिक ढर्रे से हटकर पूरी तरह से किसान-केंद्रित (Farmer-Centric) अनुसंधान और व्यावहारिक शिक्षा की दिशा में कार्य करना होगा।
किसान की जमीनी समस्याएं बनें शोध का आधार कृषि अनुसंधान की दिशा तय करते समय किसानों की वास्तविक और जमीनी समस्याओं को केंद्र में रखना अनिवार्य है। मौसम परिवर्तन, मिट्टी की घटती उर्वरता, सिंचाई जल का प्रबंधन, और फसलों की लागत कम करने जैसी वास्तविक चुनौतियां ही वैज्ञानिक शोध का मुख्य आधार होनी चाहिए। जब तक प्रयोगशालाओं का ज्ञान सीधे खेतों तक नहीं पहुँचेगा, तब तक शोध का वास्तविक लाभ देश के आम किसान को नहीं मिल सकेगा।
‘डिग्री आधारित नहीं, दक्षता आधारित हो शिक्षा’ कृषि क्षेत्र में युवाओं को तैयार करने के लिए शैक्षणिक प्रणाली में बदलाव की पुरजोर वकालत की गई है। केवल कागजी डिग्रियां बांटने के बजाय विद्यार्थियों को व्यावहारिक कौशल और दक्षता (Skill-Based Education) प्रदान करने की सख्त जरूरत है। डिग्री आधारित शिक्षा के स्थान पर दक्षता आधारित शिक्षा मॉडल अपनाने से कृषि स्नातक न केवल नए वैज्ञानिक नवाचारों को धरातल पर उतारने में सक्षम होंगे, बल्कि कृषि-उद्यमिता (Agri-Entrepreneurship) को भी नई दिशा देंगे।
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,
सीनियर एडिटर (Allrights Magazine)

