संपादकीय: भूने हुए धरतीवासी पूजा अनिल

संपादकीय: भुने हुए धरतीवासी; वीआईपी स्टेटस भूलकर ग्लोबल वार्मिंग के खिलाफ छोटे प्रयासों से ही बचेगी पृथ्वी

लेखिका: पूजा अनिल (स्पेन), हिंदी लेखिका और शिक्षिका

आजकल मेरे फोन के मौसम ऐप में एक नया फीचर लगातार मेरा ध्यान खींच रहा है। वह फीचर है— वर्तमान तापमान की तुलना उस क्षेत्र के औसत (एवरेज) तापमान रेंज से करके यह बताना कि पारा सामान्य से कितना ऊपर चल रहा है। मिसाल के तौर पर, ऐप में दिखा रहा है कि स्पेन की राजधानी मैड्रिड में इन दिनों औसत से 10 डिग्री सेल्सियस अधिक तापमान चल रहा है। यानी जहां सामान्य तापमान 25°C होना चाहिए, वहां हकीकत में पारा 35°C तक पहुंच चुका है।

मौसम विज्ञानियों की भविष्यवाणी थी कि साल 2050 तक पृथ्वी का तापमान बेहद ऊंचे स्तर पर पहुंच जाएगा। लेकिन वर्तमान में जिस आक्रामक गति से पारा बढ़ रहा है, उसे देखकर लगता है कि साल 2030 तक ही इस धरती के निवासी ‘भुने हुए धरतीवासी’ बन जाएंगे।

जरा ठंडे दिमाग से सोचिए, क्या अब केवल ‘पेड़ लगाने की मुहिम’ इस भीषण संकट को तुरंत टाल पाएगी? शहरों की बात तो छोड़िए, अब तो गांवों में भी नए पेड़ लगाने के लिए खाली जमीन मयस्सर नहीं हो रही है। ऐसे में हम कितने वृक्ष लगा पाएंगे? और मान लीजिए कि अगर हमने आनन-फानन में हर तरफ भारी पौधरोपण कर भी लिया, तो उन पौधों को घने पेड़ों में तब्दील होकर सुहानी छांव देने में कितने वर्ष लग जाएंगे? जाहिर है, इसका तुरंत लाभ तो मिलने से रहा! कुल मिलाकर इस जानलेवा समस्या का हल एयर कंडीशनर (AC) कमरों में बैठकर खोखली बहसों से नहीं निकलेगा। अगर हम अपना वीआईपी स्टेटस भुलाकर एक साधारण मनुष्य की तरह धरती पर जीवन जीना चाहें, तो हमें अपनी कई विलासिताओं को त्यागना पड़ेगा।

धरती के प्रति जिम्मेदारी: 6 आसान बदलाव जो हर नागरिक कर सकता है

यदि आप अपनी सुख-सुविधाओं का बड़ा त्याग नहीं करना चाहते, तो कम से कम अपनी जिम्मेदारी समझते हुए इन 6 बेहद छोटे और आसान कामों को अपनी दिनचर्या में जरूर शामिल करें:

  • 1. उपकरणों पर टाइमर का प्रयोग: दिन भर चलने वाले पंखे, एसी और कूलर पर टाइमर (Timer) का इस्तेमाल जरूर करें। जब कमरा पर्याप्त ठंडा हो जाए, तो ये उपकरण स्वतः बंद हो जाने चाहिए। भारी-भरकम बिजली का बिल भरने से कोई अमीर नहीं होता, बल्कि स्वच्छ हवा में सांस लेना असली अमीरी है। बिजली कम खर्च करके बिल में कटौती करें और बदले में शुद्ध हवा पाएं।

  • 2. ‘A’ सिंबल वाले ऊर्जा-कुशल उपकरण: टीवी, फ्रिज, वाशिंग मशीन जैसे घरेलू उपकरण खरीदते समय हमेशा स्टार रेटिंग या ‘A’ सिंबल (Energy Efficient) वाले उत्पाद ही लें। याद रखें, आप जो भी ऊर्जा खर्च करते हैं, वह इसी पृथ्वी के संसाधनों का दोहन करके बनाई जाती है। जितनी अधिक खपत होगी, उतना ही अधिक उत्पादन करना होगा और धरती के रिसोर्सेज उतनी ही तेजी से खत्म होंगे।

  • 3. अंधाधुंध शॉपिंग पर लगाएं लगाम: कपड़े और जूते अत्यधिक खरीदने के अपने कार्यक्रमों पर खुद रोक लगाइए। आज पूरी दुनिया में नए और पुराने कपड़ों के ऐसे ढेर लग चुके हैं, जिन्हें पहनने वाला कोई नहीं है। यह टेक्सटाइल वेस्ट धरती की सांसें घोंट रहा है। बाजार को केवल आपके पैसे से मतलब है, आपकी सेहत से नहीं। एक बार कपड़ा पहनकर फेंक देने (Fast Fashion) की आदत को हमेशा के लिए अलविदा कह दें।

  • 4. घर को ‘मार्केट प्रोडक्ट प्रयोगशाला’ न बनाएं: हमें घर में सजावटी सामान की बहुत कम आवश्यकता होती है, लेकिन फिर भी हमारे घर अनावश्यक शो-पीस से भरे पड़े हैं। एक वस्तु से बोर होते ही हम उसे फेंककर नया ले आते हैं। जरा रुकिए, थोड़ी कम सजावट से आपका घर असुंदर नहीं दिखेगा। घर की वास्तविक रौनक उसमें रहने वाले लोग होते हैं, न कि बाजारू सामान।

  • 5. जल संरक्षण (पानी की सीमित सप्लाई): पानी को उतना ही खर्च करें जितनी सच में जरूरत हो। आप आर्थिक रूप से समृद्ध हैं, इसका यह अर्थ कतई नहीं है कि आप पानी बहाने के हकदार हैं। धरती पर पीने योग्य पानी की बेहद सीमित सप्लाई है। जिस दिन यह खत्म हो गया, उस दिन अमीर-गरीब और राजा-रंक सबके बीच त्राहि-त्राहि मच जाएगी। अपनी सोसायटियों में पानी की बर्बादी रोकने के सख्त नियम बनाएं।

  • 6. दिखावे के छल और लालच से बचें: अनावश्यक सामानों की बढ़ती मांग के कारण ही फैक्ट्रियों से जहरीली गैसें और अशुद्ध पानी सह-उत्पाद (By-product) के रूप में निकल रहे हैं, जो पर्यावरण को तेजी से प्रदूषित कर रहे हैं। जब आप दिखावे और लालच में आकर फालतू सामान खरीदना बंद करेंगे, तो मांग घटेगी और प्रदूषण कम करने में आपकी सीधी भागीदारी होगी।

निष्कर्ष: चेतावनी को नजरअंदाज न करें

यह कोई ऐसे कठिन कार्य नहीं हैं जिन्हें किया न जा सके। अमीर-गरीब का भेद भूलकर अब न सिर्फ आम जनता को, बल्कि कॉपोरेट जगत, राजनीतिक दुनिया और फिल्म इंडस्ट्री के लोगों को भी इन बुनियादी नियमों पर अमल करना होगा।

अगर आप सजग हैं, तो अपने आस-पास के लोगों को भी जागरूक करें। धरती पर लगातार बढ़ते तापमान, विनाशकारी साइक्लोन (चक्रवात) और असमय होने वाली भारी वर्षा जैसी प्राकृतिक चेतावनियों को हल्के में लेने की भूल बिल्कुल न करें। वास्तविक रईसी इसी में है कि हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ हवा, शुद्ध पानी और हरी-भरी धरती बची रहे। हर नागरिक का एक छोटा सा प्रयास भी इस झुलसती हुई पृथ्वी को नया जीवन दे सकता है।


लेखिका: पूजा अनिल

गोपाल चन्द्र अग्रवाल,सीनियर एडिटर

(Allrights Magazine)


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