**जौहर यूनिवर्सिटी पर ED का छापा**

जौहर यूनिवर्सिटी पर ED का शिकंजा: आजम खान के ड्रीम प्रोजेक्ट के ‘अर्श से फर्श’ की पूरी कहानी

डिजिटल डेस्क, रामपुर। समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान के ड्रीम प्रोजेक्ट ‘मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी’ पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। बुधवार सुबह मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA) जांच के तहत ईडी की टीमों ने रामपुर, सहारनपुर और दिल्ली में स्थित जौहर ट्रस्ट और यूनिवर्सिटी से जुड़े करीब 10 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की।

एजेंसी का आरोप है कि सरकारी टेंडरों के फंड को ठेकेदारों के जरिए डाइवर्ट कर यूनिवर्सिटी और ट्रस्ट की संपत्तियां बनाने में इस्तेमाल किया गया।

अर्श: जब आजम खान का ड्रीम प्रोजेक्ट बना सत्ता का केंद्र

  • 2006 में नींव: रामपुर में विश्वस्तरीय शिक्षा संस्थान बनाने के सपने के साथ आजम खान ने 2006 में मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की स्थापना की।

  • सपा सरकार में मिला विस्तार: 2012 में उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बनने के बाद आजम खान नगर विकास और संसदीय कार्य मंत्री बने। इस दौरान सैकड़ों एकड़ में फैली इस यूनिवर्सिटी के निर्माण को गति मिली।

  • भव्य संरचना: आलीशान गेट, आधुनिक लैब्स, विशाल पुस्तकालय और मेडिकल कॉलेज के साथ यह संस्थान रामपुर में आजम खान के राजनीतिक और व्यक्तिगत रसूख का सबसे बड़ा प्रतीक बन गया।

फर्श: सत्ता बदलते ही शुरू हुई कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई

2017 में उत्तर प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद जौहर यूनिवर्सिटी और आजम खान के खिलाफ मुकदमों और कानूनी जांच का सिलसिला शुरू हो गया:

  • जमीन कब्जे के दर्जनों मामले: किसानों की जमीन हड़पने, शत्रु संपत्ति (Enemy Property) पर अवैध कब्जे और सरकारी जमीन को यूनिवर्सिटी में मिलाने के आरोप में दर्जनों एफआईआर दर्ज हुईं।

  • कब्जा मुक्त कार्रवाई: प्रशासन ने यूनिवर्सिटी के मुख्य द्वार (जौहर अली मार्ग) और चहारदीवारी के कुछ हिस्सों को अतिक्रमण मुक्त कराने की कार्रवाई की।

  • लीज रद्द और ध्वस्तीकरण का नोटिस: हाल ही में रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) द्वारा नक्शा पास न होने का हवाला देकर 38 इमारतों को गिराने का नोटिस जारी किया गया था (जिस पर बाद में कोर्ट से स्टे मिला)।

  • वित्तीय जांच का दायरा: आयकर विभाग और अब ईडी (ED) की कार्रवाई ने यूनिवर्सिटी के ट्रस्ट और फंडिंग स्रोतों पर शिकंजा कस दिया है।

ED की कार्रवाई का मुख्य आधार

ईडी की लखनऊ जोनल यूनिट के अनुसार, जांच में यह पाया गया है कि सरकारी ठेकों से लाभ कमाने वाले निजी ठेकेदारों ने डोनेशन और कंस्ट्रक्शन वर्क के नाम पर करोड़ों रुपये जौहर ट्रस्ट और यूनिवर्सिटी के खातों में ट्रांसफर किए। इसी वित्तीय हेरफेर (Proceeds of Crime) और कागजातों को जब्त करने के उद्देश्य से यह छापेमारी की गई है।

कभी रामपुर की राजनीति और शिक्षा का सबसे बड़ा केंद्र रहा यह ड्रीम प्रोजेक्ट आज मुकदमों, कुर्की, ध्वस्तीकरण के नोटिसों और केंद्रीय एजेंसियों की जांच से जूझ रहा है।


गोपाल चन्द्र अग्रवाल,

सीनियर एडिटर (Allrights Magazine)


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