E20 पेट्रोल: फेक न्यूज पर QRT का गठन

E20 पेट्रोल पर ‘फेक न्यूज’ और अफवाहें फैलाने वालों पर केंद्र सरकार सख्त: भ्रम दूर करने के लिए बनाई गई संयुक्त ‘क्विक रिस्पॉन्स टीम’

ईथलीन/एथेनॉल मिश्रित ईंधन (E20 पेट्रोल) को लेकर सोशल मीडिया और इंटरनेट प्लेटफॉर्म्स पर लगातार फैल रही भ्रामक अफवाहों, मनगढ़ंत दावों और फेक न्यूज से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। सरकार ने इंटरनेट पर फैलाए जा रहे भ्रामक अभियानों का तुरंत और तथ्यों के साथ जवाब देने के लिए विभिन्न मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारियों की एक संयुक्त ‘क्विक रिस्पॉन्स टीम’ (Quick Response Team – QRT) का गठन किया है।

इस पहल में सरकार ने केवल मंत्रालयों को ही नहीं, बल्कि ऑटोमोबाइल निर्माताओं (OEMs), ऑटो डीलरों, वाहन परीक्षण एजेंसियों (जैसे ARAI, SIAM), ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs – IOCL, BPCL, HPCL) और पेट्रोल पंप एसोसिएशनों को भी एक मंच पर जोड़ा है, ताकि जनता के सामने वैज्ञानिक प्रमाण और सटीक तथ्य रखे जा सकें।

कौन-कौन से मंत्रालय और हितधारक शामिल?

E20 फ्यूल से जुड़े दुष्प्रचार को रोकने के लिए कई प्रमुख मंत्रालयों के अधिकारी एक साथ आए हैं:

  1. अंतर-मंत्रालयी समन्वय: सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (I&B), सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH), भारी उद्योग मंत्रालय और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय मिलकर इस क्विक रिस्पॉन्स टीम को संचालित कर रहे हैं।

  2. वैज्ञानिक तथ्यों पर जोर: यह टीम सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले फेक वीडियो, डीपफेक और भ्रामक दावों की तुरंत पहचान कर आधिकारिक डेटा और वैज्ञानिक रिपोर्ट के आधार पर सच्चाई सार्वजनिक करेगी।

  3. युवाओं व वाहन मालिकों पर ध्यान: सोशल मीडिया पर सबसे अधिक सक्रिय रहने वाले वाहन चालकों, युवाओं और कंज्यूमर्स तक सही जानकारी पहुंचाना इस QRT का प्राथमिक लक्ष्य है।

E20 पेट्रोल को लेकर फैलाई जा रही प्रमुख अफवाहें और सरकार का रुख

पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया पर E20 पेट्रोल को लेकर कई दावे वायरल हो रहे थे, जिन पर सरकार और तेल कंपनियों ने वैज्ञानिक स्पष्टीकरण दिया है:

  • इंजन खराब होने का दावा: सरकार और वाहन निर्माताओं ने स्पष्ट किया है कि E20 ईंधन व्यापक टेस्टिंग और वैज्ञानिक सत्यापन के बाद ही पेश किया गया है; इससे इंजन फेल्योर की कोई प्रामाणिक शिकायत नहीं मिली है।

  • चींटियाँ आकर्षित होने और गन्ना रस मिलाने का वीडियो: सोशल मीडिया पर फ्यूल कैप के पास चींटियाँ लगने या सीधे गन्ने का रस मिलाने जैसे वीडियो वायरल हुए थे, जिन्हें बीपीसीएल (BPCL) और पेट्रोलियम मंत्रालय ने पूरी तरह बेबुनियाद और वैज्ञानिक रूप से असंभव बताया है। रिफाइनिंग प्रक्रिया के बाद एथेनॉल में कोई शुगर शेष नहीं रहती है।

  • इंश्योरेंस रद्द होने की अफवाह: E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से वाहनों का इंश्योरेंस क्लेम खारिज होने के दावों को भी सरकार ने पूरी तरह खारिज किया है।

संसद में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी स्पष्ट किया है कि एथेनॉल ब्लेंडिंग से देश की क्रूड ऑयल पर निर्भरता घटी है और यह ईंधन पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ-साथ वाहनों के लिए सुरक्षित है। फर्जी पोस्ट और डीपफेक फैलाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है


  • सीनियर एडिटर गोपाल चन्द्र अग्रवाल,

रिपोर्ट: विशेष जांच एवं क्राइम ब्यूरो, ऑल राइट्स मैगजीन, लक्ष्मी नगर, दिल्ली


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