UPI विवाद: वित्त मंत्रालय ने खारिज किए आरोप

“विदेशी दबाव का आरोप पूरी तरह बेबुनियाद”: UPI चार्जेस पर वित्त मंत्रालय की सफाई, कहा— “डिजिटल आत्मनिर्भरता हमारा लक्ष्य”

नई दिल्ली: यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) और शुल्क से जुड़े फैसलों को लेकर चल रहे सियासी घमासान के बीच केंद्र सरकार ने विपक्ष के आरोपों का करारा जवाब दिया है। विपक्षी दलों द्वारा लगाए गए “विदेशी (अमेरिकी) दबाव में फैसला लेने” के दावों को पूरी तरह से खारिज करते हुए वित्त मंत्रालय ने स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है।

बुधवार को वित्त मंत्रालय की ओर से जारी आधिकारिक स्पष्टीकरण में कहा गया कि भारत के डिजिटल पेमेंट नेटवर्क से जुड़ा हर फैसला पूरी तरह से राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और देश के स्तर पर लिया जाता है।

वित्त मंत्रालय का आधिकारिक रुख: “विदेशी दबाव से कोई लेना-देना नहीं”

मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर पोस्ट जारी कर विपक्ष के दावों की पोल खोली और नीतिगत रुख को जनता के सामने रखा:

  • पूरी तरह स्वदेशी और स्वतंत्र निर्णय: सरकार ने साफ किया है कि UPI से जुड़ा कोई भी नीतिगत निर्णय किसी भी विदेशी दबाव या बाहरी कंपनियों के प्रभाव में नहीं लिया गया है।

  • ‘डिजिटल आत्मनिर्भरता’ मुख्य उद्देश्य: नए व्यवस्थागत सुधारों और शुल्कों का एकमात्र उद्देश्य भारत के डिजिटल पेमेंट्स इकोसिस्टम को वित्तीय रूप से मजबूत, सुरक्षित, सुगम और आत्मनिर्भर (Self-Sustainable) बनाना है।

  • इकोसिस्टम का विकास: डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर को साइबर सुरक्षा, नए सर्वर और तकनीकी अपग्रेडेशन के साथ लंबे समय तक सुचारू रूप से चलाने के लिए आत्मनिर्भर मॉडल आवश्यक है।

विपक्ष के आरोपों पर सरकार का पलटवार

हाल ही में कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने आरोप लगाया था कि केंद्र सरकार अंतरराष्ट्रीय पेमेंट दिग्गज कंपनियों के दबाव में आकर जीरो-एमडीआर (Zero-MDR) नीति को कमजोर कर रही है।

  1. अफवाहों पर विराम: वित्त मंत्रालय के स्पष्टीकरण के बाद डिजिटल पेमेंट पर भ्रम फैलाने वाले दावों पर विराम लग गया है।

  2. आम जनता के हितों की रक्षा: सरकार ने दोहराया है कि सामान्य उपभोक्ताओं के दैनिक लेन-देन पर कोई असर नहीं पड़ेगा और UPI हमेशा की तरह आम भारतीयों के लिए सुलभ और आसान बना रहेगा।

‘ऑल राइट्स मैगजीन’ मानती है कि देश के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की मजबूती और वित्तीय आत्मनिर्भरता के लिए सरकारी नीतियों में पारदर्शिता और स्पष्ट संवाद अत्यंत आवश्यक है।

गोपाल चन्द्र अग्रवाल,

सीनियर एडिटर (Allrights Magazine)

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