बरेली: कमरे में बंद नवजात की मौत
बरेली: बंद कमरे में प्री-मैच्योर बच्ची की मौत, गरीबी ने छीनी मासूम की सांसें 🕯️
मजबूरी की बेड़ियाँ: रोजी-रोटी या ममता?
बरेली के किला थाना क्षेत्र में गरीबी और लाचारी की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है। एक महीने की प्री-मैच्योर जन्मी बच्ची की मौत बंद कमरे में हो गई। बच्ची के माता-पिता, जो अत्यधिक आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं, अपनी चारों संतानों को कमरे में बंद कर काम की तलाश में निकले थे। शाम को जब वे लौटे, तो घर की सबसे छोटी सदस्य दम तोड़ चुकी थी।
सात माह के गर्भ से हुआ था जन्म 📉
बच्ची का जन्म निर्धारित समय से दो माह पहले (सात माह की गर्भावस्था में) हुआ था। ऐसे ‘प्री-मैच्योर’ बच्चों को विशेष चिकित्सा देखभाल और निरंतर निगरानी की आवश्यकता होती है, लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत थी:
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पारिवारिक पृष्ठभूमि: शादाब और उनकी पत्नी हिना के पास न अपना घर है और न ही खेती की जमीन। वे दूसरों से मदद मांगकर अपना और अपने तीन अन्य बच्चों का पेट पालते हैं।
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घटनाक्रम: शुक्रवार को हमेशा की तरह हिना और शादाब अपने बुजुर्ग माता-पिता के साथ काम पर निकल गए। सुरक्षा के लिहाज से उन्होंने चारों बच्चों को किराये के कमरे में बंद कर दिया था और बड़ी बेटी को छोटी बहन का ख्याल रखने को कहा था।
भाई-बहनों को लगा ‘छुटकी’ सो रही है 💔
शाम को जब माता-पिता घर लौटे, तो मंजर भयानक था। नवजात बच्ची मृत अवस्था में मिली। दुखद बात यह है कि साथ में बंद अन्य तीनों मासूम बच्चों को यह अहसास तक नहीं था कि उनकी बहन अब इस दुनिया में नहीं है; वे यही मान रहे थे कि उनकी ‘छुटकी’ गहरी नींद में सो रही है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस की कार्रवाई ⚖️
किला थाना प्रभारी सुभाष कुमार ने बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस बल मौके पर भेजा गया था। शनिवार को आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पुष्टि हुई कि बच्ची कई बीमारियों से घिरी थी और प्री-मैच्योर होने के कारण उसकी शारीरिक स्थिति बेहद नाजुक थी। समुचित उपचार और पोषण के अभाव ने अंततः उसकी जान ले ली।
मुख्य बिंदु:
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स्थान: किला थाना क्षेत्र, बरेली।
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कारण: अत्यधिक गरीबी और चिकित्सा देखभाल का अभाव।
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संदेश: यह घटना समाज और प्रशासन के सामने सवाल खड़ा करती है कि ‘अंत्योदय’ का लक्ष्य अभी भी कितना दूर है।
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,
सीनियर एडिटर (आल राइट्स मैगज़ीन )

