अजगैवीनाथ धाम: सीढ़ी घाट पहुंची गंगा
अजगैवीनाथ धाम: सीढ़ी घाट पहुंची गंगा
अजगैवीनाथ धाम (सुल्तानगंज)। विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेले के शुभारंभ के साथ ही सुल्तानगंज स्थित उत्तरवाहिनी गंगा की मुख्य धारा ने एक बार फिर अजगैवीनाथ पहाड़ी को अपने आगोश में ले लिया है। पतित पावनी गंगा का जलस्तर बढ़ने और धारा के सीढ़ियों तक पहुंचने से लाखों श्रद्धालुओं और कांवड़ियों के चेहरे खिल उठे हैं। अब बाबा धाम (देवघर) जाने वाले कांवड़ियों को पक्की सीढ़ी घाट पर पूरी तरह सुरक्षित और सुगम स्नान का आनंद मिलेगा। इसके साथ ही श्रद्धालुओं को अब फिसलन या गहरे पानी में डूबने की चिंता से भी बड़ी राहत मिली है।
1982 में रखी गई थी सुरक्षित स्नान की नींव
कांवड़ियों की भारी भीड़ और उनकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए वर्ष 1982 में बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. जगन्नाथ मिश्र ने अजगैवीनाथ मंदिर के ठीक सामने इस ऐतिहासिक पक्की सीढ़ी घाट का निर्माण कराया था। उस समय से ही यह परंपरा सी बन गई है कि हर साल श्रावणी मेले की शुरुआत से ठीक पहले गंगा की धारा इन सीढ़ियों को स्पर्श करने लगती है। इससे देश-विदेश से आने वाले लाखों कांवड़िए आसानी से पवित्र गंगाजल भरकर अपनी 105 किलोमीटर लंबी कठिन पैदल यात्रा शुरू कर पाते हैं।
उत्तरवाहिनी गंगा और अजगैवीनाथ का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सुल्तानगंज ही पूरे भारत में एकमात्र ऐसा पवित्र स्थान है जहाँ गंगा नदी दक्षिण से उत्तर दिशा की ओर (उत्तरवाहिनी) बहती है। यहाँ बीच नदी में स्थित एक विशाल चट्टानी पहाड़ी पर भगवान भोलेनाथ का प्राचीन अजगैवीनाथ मंदिर स्थापित है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, यहाँ महर्षि जह्नु ने तपस्या की थी और यही स्थान भगवान शिव के ‘अजगव’ धनुष से भी जुड़ा हुआ है।
श्रावण मास में लाखों श्रद्धालु यहाँ से उत्तरवाहिनी गंगा का पवित्र जल कांवड़ में भरकर पैदल यात्रा करते हुए झारखंड स्थित द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक बाबा वैद्यनाथ धाम में जलाभिषेक करते हैं।
सुगम स्नान से कांवड़ियों और प्रशासन को बड़ी राहत
मेला क्षेत्र में गंगा जलस्तर के सामान्य होने और सीढ़ियों तक पहुँचने से स्थानीय प्रशासन और गोताखोरों की टीमों ने भी राहत की सांस ली है। पक्की सीढ़ी घाट पर जलधारा पहुँचने के कारण श्रद्धालुओं को दलदल या ऊबड़-खाबड़ रास्तों से होकर नदी में नहीं उतरना पड़ेगा।
स्थानीय सेवा समितियों और पुरोहितों का कहना है कि पक्की सीढ़ियों पर पानी रहने से बुजुर्ग, महिला और बच्चे बेहद सुरक्षित वातावरण में स्नान कर पा रहे हैं। मेला क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए प्रशासन द्वारा बैरिकेडिंग और चेंजिंग रूम की विशेष व्यवस्था भी की गई है।

