पॉलिटेक्निक के 2 कोर्स बने पहली पसंद
पॉलिटेक्निक कॉलेज में इन दो कोर्स का बढ़ा क्रेज: केमिकल और मेंटेनेंस इंजीनियरिंग बने युवाओं की पहली पसंद
देहरादून: उत्तराखंड के पॉलिटेक्निक संस्थानों में तकनीकी शिक्षा का परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। पारंपरिक पाठ्यक्रमों के बजाय अब युवा केमिकल इंजीनियरिंग और मेंटेनेंस इंजीनियरिंग जैसे रोजगारपरक (Job-oriented) कोर्स की ओर अधिक आकर्षित हो रहे हैं। उद्योगों में बढ़ती मांग और शानदार प्लेसमेंट पैकेज ने इन दोनों ट्रेड्स को करियर की नई उड़ान के लिए पहली पसंद बना दिया है।
क्यों बढ़ रही है इन कोर्सेज की मांग?
औद्योगिक विशेषज्ञों के अनुसार, केमिकल और मेंटेनेंस सेक्टर में कुशल तकनीकी जनशक्ति (Technical Manpower) की भारी कमी है। यही कारण है कि इन ट्रेड्स में प्रशिक्षित छात्रों को हाथों-हाथ लिया जा रहा है।
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केमिकल इंजीनियरिंग: दवा उद्योग (Pharma), पेंट, उर्वरक और रिफाइनरी जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञों की मांग बढ़ी है।
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मेंटेनेंस इंजीनियरिंग: बड़े उद्योगों में मशीनों के रखरखाव और संचालन के लिए मेंटेनेंस इंजीनियरों की भूमिका अनिवार्य हो गई है।
आकर्षक प्लेसमेंट पैकेज और सक्रिय प्लेसमेंट सेल
प्राविधिक शिक्षा विभाग ने छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए सभी पॉलिटेक्निक संस्थानों में प्लेसमेंट सेल को पहले से कहीं अधिक सक्रिय किया है।
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इंडस्ट्री समन्वय: संस्थानों और उद्योगों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया गया है, जिससे कैंपस प्लेसमेंट में तेजी आई है।
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सीधी नौकरी: पढ़ाई पूरी करने से पहले ही कई बड़ी कंपनियां छात्रों को अच्छे पैकेज पर जॉब ऑफर दे रही हैं।
संस्थानों के विस्तार की योजना
डिमांड को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में इन कोर्सेज का क्रेज और बढ़ेगा। विभाग अब इस बात पर विचार कर रहा है कि जिन संस्थानों में अभी ये ट्रेड उपलब्ध नहीं हैं, वहां भी इन्हें जल्द शुरू किया जाए ताकि अधिक से अधिक युवा इसका लाभ उठा सकें।
निष्कर्ष: पॉलिटेक्निक शिक्षा अब केवल डिग्री तक सीमित नहीं रही, बल्कि कौशल विकास (Skill Development) के जरिए सीधे रोजगार से जुड़ गई है। केमिकल और मेंटेनेंस इंजीनियरिंग की बढ़ती लोकप्रियता इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है।
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,
सीनियर एडिटर(Allrights Magazine)

