आज देशभर के 15 लाख मेडिकल स्टोर बंद
ऑनलाइन दवाओं की बिक्री के विरोध में आज देशव्यापी हड़ताल; देशभर के 15 लाख से अधिक मेडिकल स्टोर बंद, मरीज बेहाल
(नई दिल्ली): दवाओं की ऑनलाइन बिक्री (E-Pharmacy) और कॉर्पोरेट जगत की बड़ी कंपनियों से मिल रही कड़ी प्रतिस्पर्धा के विरोध में आज बुधवार को देश की स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर आज देशभर के 15 लाख से ज्यादा मेडिकल स्टोर और दवा दुकानें पूरी तरह बंद हैं। संगठन ने अपनी मांगों को लेकर एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल (One-Day Strike) का एलान किया है।
क्यों बंद हैं देशभर के मेडिकल स्टोर? ये हैं मुख्य कारण
दवा व्यापारियों और केमिस्ट एसोसिएशन का आरोप है कि ऑनलाइन माध्यम से दवाओं की अवैध और अनियंत्रित बिक्री से न सिर्फ उनके रोजगार पर संकट मंडरा रहा है, बल्कि यह आम जनता की सेहत के लिए भी बेहद खतरनाक है:
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ई-फार्मेसी पर प्रतिबंध की मांग: एसोसिएशन का कहना है कि बिना उचित डॉक्टर के पर्चे (Prescription) के ऑनलाइन धड़ल्ले से बिक रही दवाओं, विशेषकर नशीली और प्रतिबंधित दवाओं के दुरुपयोग पर सरकार लगाम लगाने में पूरी तरह विफल रही है।
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कॉरपोरेट कंपनियों से असमान प्रतिस्पर्धा: बड़ी कॉर्पोरेट और ई-कॉमर्स कंपनियां भारी डिस्काउंट देकर खुदरा दवा बाजार (Retail Market) को खत्म करने का प्रयास कर रही हैं, जिससे देश के लाखों छोटे केमिस्ट्स की आजीविका दांव पर लग गई है।
मरीजों की बढ़ी मुश्किलें; इमरजेंसी सेवाएं चालू रखने का दावा
हड़ताल के कारण सुबह से ही देश के अलग-अलग हिस्सों में मरीजों और उनके तीमारदारों को जरूरी दवाएं खरीदने के लिए भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, संगठन ने आम जनता की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए कुछ राहत देने की बात भी कही है:
“AIOCD के पदाधिकारियों के अनुसार, मरीजों की गंभीर स्थिति को देखते हुए अस्पतालों के अंदर स्थित मेडिकल स्टोर और आपातकालीन (Emergency) दवा काउंटरों को इस हड़ताल से मुक्त रखा गया है, ताकि किसी भी मरीज की जान पर संकट न आए। फिर भी, आम रिटेल दुकानें बंद होने से रोजमर्रा की दवाएं लेने वालों को भटकना पड़ रहा है।”
दवा व्यापारियों की इस देशव्यापी एकजुटता और हड़ताल ने केंद्र सरकार के सामने ई-फार्मेसी के लिए कड़े नियम-कायदे बनाने का दबाव एक बार फिर बढ़ा दिया है।
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,सीनियर एडिटर
(Allrights Magazine)

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