यूपी आकांक्षी जिलों में फंड का खर्च शून्य

करोडों का फंड पड़ा, उपयोग शून्य: यूपी के आकांक्षी जिलों और ब्लॉक्स में बजट खर्च पर उठे गंभीर सवाल

लखनऊ – उत्तर प्रदेश के आकांक्षी जिलों और ब्लॉक्स में विकास कार्यों के लिए स्वीकृत धनराशि के उपयोग को लेकर एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में आकांक्षी जिला कार्यक्रम के तहत प्रदेश के आठ जिलों के लिए ₹10.81 करोड़ की राशि स्वीकृत की गई थी, लेकिन इसमें से केवल ₹2.25 करोड़ ही खर्च हो सके।

चौंकाने वाली बात यह है कि आठ में से सात जिलों में बजट का उपयोग पूरी तरह शून्य (Zero) दर्ज किया गया है। लोकसभा में सांसद नीरज मौर्य और अन्य सांसदों द्वारा पूछे गए सवालों के लिखित जवाब में केंद्र सरकार ने यह आंकड़े प्रस्तुत किए हैं।

आकांक्षी जिलों में बजट की स्थिति

  • शून्य खर्च वाले जिले: बहराइच (₹3.49 करोड़), बलरामपुर (₹5 लाख), चंदौली (₹1.55 करोड़), चित्रकूट (₹1.55 करोड़), फतेहपुर (₹1.49 करोड़), श्रावस्ती (₹5 लाख) और सोनभद्र (₹5 लाख)।

  • अपवाद: केवल सिद्धार्थनगर में स्वीकृत ₹2.575 करोड़ में से ₹2.2453 करोड़ की राशि खर्च की जा पाई।

बरेली के 3 ब्लॉक्स में ₹1.11 करोड़ स्वीकृत, पर खर्च ₹0

आकांक्षी ब्लॉक कार्यक्रम (Aspirational Blocks Programme) में भी धनराशि के इस्तेमाल का हाल निराशाजनक है। बरेली जिले के तीन प्रमुख आकांक्षी ब्लॉक्स के लिए लगभग ₹1.11 करोड़ स्वीकृत किए गए थे, लेकिन जमीनी स्तर पर एक रुपया भी खर्च नहीं हुआ:

  • बहेड़ी: ₹1.0044 करोड़ स्वीकृत ➔ खर्च: शून्य

  • दमखौदा: ₹5.30 लाख स्वीकृत ➔ खर्च: शून्य

  • फतेहगंज पश्चिमी: ₹5.30 लाख स्वीकृत ➔ खर्च: शून्य

इसके अलावा बदायूं (अंबियापुर, आसफपुर), जौनपुर (मछलीशहर, रामपुर) और कासगंज (अमांपुर, गंजडुंडवारा) के आकांक्षी ब्लॉक्स में भी विकास फंड का उपयोग शून्य ही दर्ज किया गया।

कागजों पर सुधरा स्कोर, पर धरातल पर योजनाएं अधर में

संसद में सांसदों ने डिजिटल क्लासरूम, मॉडल आंगनवाड़ी केंद्रों, पेयजल परियोजनाओं, रखरखाव, बिजली, इंटरनेट और कौशल विकास से जुड़ी जमीनी समस्याओं पर भी ब्योरा मांगा था।

नीति आयोग के आंकड़ों के मुताबिक मार्च 2026 तक बरेली के आकांक्षी ब्लॉक्स का ओवरऑल परफॉरमेंस स्कोर कागजों पर बेहतर दर्ज हुआ है (जैसे बहेड़ी का स्कोर 59.90 से बढ़कर 83.13 हुआ)। हालांकि, केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया कि जिला और ब्लॉक स्तर की परियोजनाओं का कोई समेकित डेटा नीति आयोग द्वारा संधारित नहीं किया जाता। ऐसे में बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब बजट खर्च ही नहीं हुआ, तो जमीनी स्तर पर सुविधाएं कैसे मजबूत हो रही हैं?

गोपाल चन्द्र अग्रवाल,

सीनियर एडिटर (Allrights Magazine)


ऑलराइट्स मैगजीन की स्वतंत्रता बधाई!

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