वर्धा: हिंदी विवि के दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति
वर्धा: महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में शामिल हुईं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु
महाराष्ट्र के वर्धा स्थित महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय का छठा दीक्षांत समारोह आज राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुआ। इस अवसर पर राष्ट्रपति ने मेधावी विद्यार्थियों को उपाधियाँ प्रदान कीं और भारतीय भाषाओं व शिक्षा के महत्व पर अपने विचार साझा किए।
भारतीय भाषाओं में प्रवाहित होती है एक ही चेतना
अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने भाषाओं को राष्ट्र की आत्मा से जोड़ते हुए कहा:
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संस्कृति का संगम: विभिन्न भारतीय भाषाओं में संस्कृति, संवेदनशीलता और चेतना की एक ही धारा प्रवाहित होती है। भारतीय भाषाओं के माध्यम से ही भारत की वास्तविक आत्मा की अभिव्यक्ति संभव है।
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विविधता में एकता: उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि पूर्वोत्तर सहित पूरे देश के छात्र यहाँ शिक्षा पा रहे हैं। यह ‘अंतरभाषाई संवाद’ हिंदी और अन्य सभी भारतीय भाषाओं की उन्नति में सहायक होगा।
विद्यार्थियों के लिए दो राष्ट्रीय उद्देश्य
राष्ट्रपति मुर्मु ने युवाओं को अपनी विरासत पर गर्व करने की सलाह देते हुए दो प्रमुख लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करने को कहा:
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औपनिवेशिक मानसिकता का त्याग: गुलामी की मानसिकता के अवशेषों को पूरी तरह मिटाना।
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भारतीय ज्ञान परंपरा: भारत की प्राचीन और समृद्ध ज्ञान परंपरा को वैश्विक स्तर पर फिर से स्थापित करना। उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि हमें किसी भी भाषा का विरोध नहीं करना चाहिए, बल्कि सभी भारतीय भाषाओं पर गर्व करना चाहिए।

गांधीवादी शिक्षा का महत्व
विश्वविद्यालय के नामकरण की सार्थकता पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा:
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स्वावलंबन का आधार: महात्मा गांधी शिक्षा को आत्मनिर्भरता का जरिया मानते थे।
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सार्थक शिक्षा: राष्ट्रपति के अनुसार, वही शिक्षा सार्थक है जो जनभावनाओं को समझे और लोगों के जीवन में सकारात्मक योगदान दे। जो शिक्षा राष्ट्र हित में नहीं, वह व्यर्थ है।


विकसित भारत के लिए मौलिक चिंतन
राष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि सृजन, अन्वेषण और नवाचार के लिए अपनी भाषा ही सबसे सशक्त माध्यम है।
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नकल नहीं, सृजन: उन्होंने युवाओं से नकल की जगह मौलिक रचनाओं और नवाचार की ओर बढ़ने का आह्वान किया।
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आत्मनिर्भर भारत: उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि एक सशक्त और विकसित भारत का निर्माण भारतीय भाषाओं के सुदृढ़ आधार पर ही संभव होगा।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति ने उम्मीद जताई कि यहाँ के युवा छात्र न केवल अपना व्यक्तिगत विकास करेंगे, बल्कि राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाकर वैश्विक मंच पर भारत का मान बढ़ाएंगे।
(रिपोर्ट: सोनू कुमार, पत्रकार)
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,
सीनियर एडिटर (Allrights Magazin)

