जर्जर व बदहाली की शिकार बेबस सड़क का छलकता दर्द

बरेली : कहा जाता है कि जब कोई जख्म नासूर बन जाता है तो बहुत कष्ट पहुंचाता है, ऐसा ही कुछ हाल माननीय सांसद जी के कार्यालय से लेकर कोहाड़ापीर पेट्रोल पंप तक टूटी फूटी, गड्ढों भरी व गंदे पानी से भरी तालाबमय सड़क का है। अखिल भारतीय कायस्थ महासभा पश्चिम उत्तर प्रदेश के सांस्कृतिक प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष एवं उपजा प्रेस क्लब के सचिव आशीष कुमार जौहरी के अनुसार ना जाने कितने वर्षों से यह सड़क अपने इन हालातों पर शर्मिंदा है।

अनगिनत बार रिक्शो को पलटते हुए, स्कूली छात्र छात्राओं को स्कूटी और बाइक से गिरते हुए एवं बुजुर्गों को ई-रिक्शा से गिरकर चोट खाते हुए देखा गया है , परंतु टूटी फूटी, गड्ढों भरी एवं गंदे पानी से भरी तालाब मय सड़क अपने खस्ता हाल में ही लोगों को गिरते हुए एवं चोट खाते हुए देखकर शर्मिंदा होती रहती है , खस्ताहाल मार्ग पर जगह-जगह गढ्डों से एवं पानी भरा होने से आवागमन दुश्वार है।

लोग जर्जर सड़क पर आवागमन करने को मजबूर हैं। बरसात के दिनों में स्थित और भी दयनीय हो जाती है। शायद यह सड़क का दुर्भाग्य है कि उसको सिर्फ इंतजार है 2022 या शायद 2024 का। परंतु तब तक ना जाने कितने रिक्शो को गंदे पानी में पलटते हुए एवं स्कूटी व बाइक से गिरते हुए लोगों को देख कर उसे अपने दुर्भाग्य को कोसना होगा। अब देखना यह है कि एक बेबस सड़क के छलकते हुए दर्द को मरहम कब नसीब होगा।

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