उत्तम नगर: परमपुरी में बुलडोजर की ‘खानापूर्ति’
सत्या निकेतन हादसे के बाद भी जागी नहीं MCD: उत्तम नगर के परमपुरी (वार्ड 115) में अवैध इमारत पर ‘बुलडोजर की खानापूर्ति’, सवालों से भागे JE अखिलेश
विशेष रिपोर्ट: अनिल बेदाग
नई दिल्ली: सत्या निकेतन में हुए दर्दनाक पीजी हादसे के बाद पूरी दिल्ली में नगर निगम (MCD) के ढुलमुल रवैये और प्रशासनिक लापरवाही को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। इसके बावजूद, निगम के भ्रष्ट और बेपरवाह अधिकारी अपनी कार्यशैली सुधारने के बजाय महज कागजी खानापूर्ति और दिखावे की कार्रवाई में जुटे हैं। ताजा मामला पश्चिम-दक्षिण दिल्ली की उत्तम नगर विधानसभा के अंतर्गत परमपुरी (वार्ड 115) से सामने आया है, जहां एक निर्माणाधीन अवैध बहुमंजिला इमारत पर MCD के बुलडोजर ने ‘सिर्फ नाममात्र’ की कार्रवाई कर इतिश्री कर ली।
सबसे शर्मनाक बात यह रही कि जब मीडिया और स्थानीय नागरिकों ने मौके पर मौजूद बिल्डिंग विभाग के जूनियर इंजीनियर (JE) अखिलेश से इस दिखावटी कार्रवाई और अवैध निर्माण की शह पर सवाल पूछे, तो वे जवाब देने के बजाय कैमरे से अपना मुंह छिपाकर भागते नजर आए।
परमपुरी वार्ड 115: ‘बुलडोजर का दिखावा’ और JE का भागना
उत्तम नगर के परमपुरी इलाके में बन रही इस अवैध इमारत को लेकर स्थानीय लोगों ने कई बार लिखित शिकायतें दर्ज कराई थीं। लेकिन MCD के अधिकारियों ने निर्माण के दौरान कोई कदम नहीं उठाया। सत्या निकेतन हादसे और उच्च अधिकारियों के दबाव के बाद जब बुलडोजर दस्ता मौके पर पहुंचा, तो पूरी कार्रवाई महज एक नाटक साबित हुई:
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खानापूर्ति की कार्रवाई: विशालकाय अवैध इमारत के मुख्य ढांचे को नुकसान पहुंचाए बिना केवल एकाध ईंट-दीवार तोड़कर बुलडोजर वापस लौट गया, ताकि बाद में बिल्डर आसानी से दोबारा निर्माण शुरू कर सके।
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सवालों के घेरे में JE अखिलेश: मौके पर मौजूद बिल्डिंग विभाग के JE अखिलेश से जब पूछा गया कि इस अवैध निर्माण की अनुमति कैसे मिली और केवल नाममात्र का पीला पंजा क्यों चलाया जा रहा है, तो वे सवालों का सामना करने की हिम्मत नहीं जुटा सके और आनन-फानन में गाड़ी में बैठकर रफूचक्कर हो गए।
‘हफ्ता वसूली और दिखावटी पीला पंजा’ — भ्रष्टाचार का पूरा मॉडल
दिल्ली के विभिन्न इलाकों—चाहे लक्ष्मी नगर हो, मेहरौली हो या अब उत्तम नगर का परमपुरी—MCD के बिल्डिंग विभाग का एक ही तय पैटर्न नजर आ रहा है:
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निर्माण के वक्त आंखें मूंदना: जब बिल्डर बेसमेंट से लेकर अवैध मंजिलें तान रहा होता है, तब जेई और बीट अफसर रिश्वत और हफ्ता लेकर चुप्पी साध लेते हैं।
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शिकायत पर सांकेतिक कार्रवाई: जब मामला मीडिया में उछलता है या जनता कोर्ट का रुख करती है, तो ‘अतिक्रमण दस्ता’ भेजकर इमारत के एक छोटे हिस्से पर बुलडोजर चला दिया जाता है।
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मामला ठंडा होते ही दोबारा निर्माण: फोटो खिंचवाने और फाइलों में कार्रवाई दर्ज करने के बाद बिल्डर फिर से काम शुरू कर देता है और आम जनता किसी बड़े हादसे के मुहाने पर खड़ी रह जाती है।
‘ऑल राइट्स मैगजीन’ का सीधा सवाल: कब तय होगी JE अखिलेश जैसे अधिकारियों की जवाबदेही?
सत्या निकेतन की त्रासदी में मासूम छात्रों की जान जाने के बाद भी यदि परमपुरी (वार्ड 115) जैसे इलाकों में अधिकारियों का यह रवैया है, तो यह साफ दिखाता है कि निगम के निचले अमले को किसी की जान की परवाह नहीं है।
‘ऑल राइट्स मैगजीन’ निगम आयुक्त (MCD Commissioner) और सतर्कता विभाग (Vigilance Department) से यह मांग करती है कि:
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परमपुरी वार्ड 115 में हुई इस दिखावटी कार्रवाई की जांच कराई जाए।
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सवालों से भागने वाले JE अखिलेश और संबंधित अधिकारियों पर रिश्वतखोरी व कर्तव्य में लापरवाही बरतने के तहत तुरंत सस्पेंशन और अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।
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इस अवैध इमारत को पूरी तरह ध्वस्त कर सील किया जाए ताकि भविष्य में सत्या निकेतन जैसा हादसा उत्तम नगर में न दोहराया जाए।
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,
सीनियर एडिटर (Allrights Magazine)
