नशे के मुद्दे पर पंजाब में घमासान: ‘आप’ सरकार के खिलाफ फूटा जन-आक्रोश

“नशा मुक्त पंजाब के लिए जन-आक्रोश”: ‘आप’ सरकार के दावों पर उठे सवाल; पंजाब में नशा विरोधी अभियान से बढ़ा राजनीतिक पारा

चंडीगढ़/नई दिल्ली: पंजाब में पैर पसारते नशे के जाल और युवाओं के भविष्य को हो रहे नुकसान को लेकर जन-आक्रोश और राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार द्वारा सत्ता में आने के दौरान किए गए ‘नशा मुक्ति’ के दावों के विपरीत, आज प्रदेश भर में प्रभावित परिवारों और माताओं-बहनों का आक्रोश चरम पर है। भाजपा द्वारा आयोजित ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ के माध्यम से राज्य के गाँव-गाँव और चौपालों तक नशा माफिया के खिलाफ आवाज उठाई जा रही है।

पंजाब की जनता और विरोधी दलों का आरोप है कि ‘आप’ सरकार के कार्यकाल में नशा माफिया को प्रशासनिक व राजनीतिक शह मिल रही है, जिससे राज्य का युवा दलदल में धकेला जा रहा है।

‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’: जन-जन का संकल्प और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप

पंजाब के 117 विधानसभा क्षेत्रों को कवर करने के उद्देश्य से शुरू की गई विरोध यात्राओं के दौरान विपक्षी दलों और स्थानीय नागरिकों ने सीधे सरकार को निशाने पर लिया है:

  • विपक्षी दलों का हमला: केंद्रीय मंत्रियों और भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि भगवंत मान सरकार ने नशा खत्म करने की समय-सीमा (Deadlines) तय की थी, लेकिन धरातल पर स्थितियां लगातार बिगड़ती चली गईं।

  • संवेदनहीनता के आरोप: पीड़ितों का कहना है कि जब स्थानीय नागरिक या प्रभावित परिवार नशा तस्करों की शिकायत दर्ज कराते हैं, तो दोषियों पर कार्रवाई के बजाय शिकायतकर्ताओं को ही प्रताड़ित किया जाता है।

  • ‘आप’ सरकार की सफाई: दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी का दावा है कि उनकी पुलिस और प्रशासन ‘युद्ध नशे विरुद्ध’ अभियान के तहत एंटी-ड्रोन तकनीक और सतर्कता से सीमा पार से आने वाले नशे को रोक रहे हैं, जबकि पड़ोसी राज्यों से आ रही खेपों पर लगाम लगाना केंद्र की जिम्मेदारी है।

नशे के खिलाफ जन-आंदोलन का समय

पंजाब, जो कभी अपनी खुशहाली, कृषि, सेना में योगदान और खेल प्रतिभाओं के लिए जाना जाता था, आज नशे के इस गंभीर संकट से उबारने के लिए एक निर्णायक जन-आंदोलन की मांग कर रहा है:

  1. सुरक्षा और पुनर्वास की सख्त आवश्यकता: केवल बयानों से इतर, जमीनी स्तर पर नशा तस्करों की संपत्तियों को जब्त करने और नशे की गिरफ्त में आए युवाओं के प्रभावी पुनर्वास (Rehabilitation) के लिए ठोस प्रशासनिक इच्छाशक्ति की जरूरत है।

  2. माताओं-बहनों का संकल्प: राज्य की त्रस्त जनता और महिलाएं अब अपने बच्चों के सुरक्षित भविष्य के लिए संगठित होकर सरकार और नशा माफिया की मिलीभगत के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार कर रही हैं।

‘ऑल राइट्स मैगजीन’ पंजाब की युवा पीढ़ी को नशे की विभीषिका से बचाने, कड़े कानूनी प्रवर्तन (Law Enforcement) और प्रदेश को पुनः समृद्ध बनाने वाले हर प्रयास का पुरजोर समर्थन करती है।

गोपाल चन्द्र अग्रवाल,

सीनियर एडिटर (Allrights Magazine)

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