बदायूं: 50-50 हजार के इनामी दो ठग भाई अरेस्ट

बदायूं में करोड़ों की ठगी करने वाले 50-50 हजार के इनामी दो सगे भाई अरेस्ट: एसटीएफ ने लखनऊ से दबोचा, चिटफंड कंपनियों के नाम पर बनाया था शिकार

विशेष रिपोर्ट: अनिल बेदाग

लखनऊ/बदायूं: उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की नोएडा फील्ड इकाई को वित्तीय धोखाधड़ी के खिलाफ बड़ी सफलता मिली है। एसटीएफ की टीम ने बदायूं में फर्जी चिटफंड कंपनियां खोलकर हजारों लोगों का पैसा हड़पने और कम समय में पैसा दोगुना करने का लालच देकर करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले दो सगे भाइयों शशिकांत मौर्य और सूर्यकांत मौर्य को लखनऊ के कृष्णानगर इलाके से गिरफ्तार कर लिया है। दोनों पर 50-50 हजार रुपये का इनाम घोषित था और वे लंबे समय से फरार चल रहे थे।

कृष्णानगर के मानसनगर से हुई गिरफ्तारी एसटीएफ नोएडा इकाई को सटीक सूचना मिली थी कि बदायूं के कोतवाली थाने में ठगी और जालसाजी के मामलों में वांछित चल रहे दोनों इनामी भाई लखनऊ के कृष्णानगर क्षेत्र में छिपे हुए हैं।

अपर पुलिस अधीक्षक राज कुमार मिश्रा के पर्यवेक्षण तथा पुलिस उपाधीक्षक नवेन्दु कुमार के नेतृत्व में निरीक्षक सचिन कुमार व उप-निरीक्षक सनत कुमार की टीम ने 7 सितंबर 2026 की शाम लगभग 5:40 बजे मानसनगर, थाना कृष्णानगर (लखनऊ) से दोनों अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तार अभियुक्तों का विवरण:

  1. शशिकान्त मौर्य (उम्र लगभग 58 वर्ष)।

  2. सूर्यकान्त मौर्य (उम्र लगभग 50 वर्ष)।

  • निवासी: चांद खां, निकट ईसाई की पुलिया, थाना बारादरी, जनपद बरेली (उ०प्र०)।

  • पुरस्कार राशि: ₹50,000 – ₹50,000 (परिक्षेत्र स्तर से घोषित)।

पैसा दोगुना करने का लालच और करोड़ों का फ्रॉड: कैसे फैलाया जाल? एसटीएफ द्वारा की गई पूछताछ में दोनों अभियुक्तों ने अपने नेटवर्क और ठगी के तौर-तरीकों की पूरी कहानी उजागर की:

  • किराने की दुकान से ठगी के साम्राज्य तक: शशिकांत ने वर्ष 1988 में बदायूं में किराने की दुकान से शुरुआत की थी। इसके बाद फाइनेंस कंपनी में एजेंट रहने के बाद उसने खुद की ‘अमर ज्योति हायर परचेज’ नाम से कंपनी बनाई, जिसमें शेयर के नाम पर लोगों से निवेश कराया जाता था।

  • अमर ज्योति यूनिवर्स निधि लि० का गठन: वर्ष 2016 में इन्होंने ‘अमर ज्योति यूनिवर्स निधि लि०’ नामक कंपनी शुरू की। इसके जरिए आम जनता के जमा खाते खुलवाए गए और कम समय में धन दोगुना करने का झांसा देकर हजारों लोगों से करोड़ों रुपये जुटाए गए।

  • बरेली छोड़कर फरार, दिल्ली और लखनऊ में छिपा ठिकाना: जब निवेशकों ने अपने पैसे वापस मांगने शुरू किए, तो दोनों भाई बरेली स्थित अपने कार्यालयों में ताला लगाकर फरार हो गए। गिरफ्तारी से बचने के लिए वे करीब 8 महीने तक उत्तम नगर (दिल्ली) में छिपे रहे और फिर लखनऊ के मानसनगर में किराए पर रहने लगे थे।

आपराधिक इतिहास: पकड़े गए दोनों अभियुक्तों के खिलाफ बदायूं के थाना कोतवाली और बरेली के थाना बारादरी में धोखाधड़ी (420 IPC / BNS की संबंधित धाराओं) तथा अमानत में खयानत के करीब 9 गंभीर आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं।

एसटीएफ की टीम ने दोनों अभियुक्तों को थाना कोतवाली, जनपद बदायूं में दर्ज मुकदमा अपराध संख्या 167/2026 में दाखिल कर दिया है, जहां स्थानीय पुलिस द्वारा अग्रिम कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

गोपाल चन्द्र अग्रवाल,

सीनियर एडिटर (Allrights Magazine)

 

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