UPI MDR शुल्क: नोएडा के व्यापारी खुद सहेंगे लागत

नोएडा के व्यापारी वर्ग में यूपीआई एमडीआर (UPI MDR) शुल्कों को लेकर असमंजस: ‘ग्राहकों पर नहीं डालेंगे बोझ, खुद सहेंगे लागत’

नोएडा (उत्तर प्रदेश): अगले माह से लागू होने जा रहे यूपीआई मर्चेंट डिस्काउंट रेट (UPI MDR) शुल्कों को लेकर नोएडा के व्यापारियों और व्यवसायियों के बीच मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। डिजिटल भुगतान की सुगमता और व्यवसाय संचालन पर इसके वित्तीय प्रभाव के बीच संतुलन बनाते हुए, अधिकांश दुकानदारों का मानना है कि वे इस अतिरिक्त लागत को ग्राहकों पर पास करने के बजाय खुद वहन करेंगे, ताकि ग्राहकों का विश्वास और फुटफॉल (Footfall) बना रहे।

व्यापारिक संगठनों और स्थानीय बाजार संघों के बीच इस नए बदलाव को लेकर विस्तृत चर्चा का दौर जारी है।

नोएडा के प्रमुख बाजारों का रुख: सेक्टर-18 और निठारी मार्केट की स्थिति

व्यवसायियों की राय जानने के लिए जब सेक्टर-31 के व्यस्त निठारी मार्केट और सेक्टर-18 के इलेक्ट्रॉनिक गुड्स स्टोर्स के संचालकों से बातचीत की गई, तो व्यापारिक दृष्टिकोण में स्पष्टता दिखाई दी:

  • ग्राहकों पर बोझ डालना अनुचित: सेक्टर-18 के प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक्स स्टोर मालिक हरीश गुप्ता का कहना है कि एमडीआर शुल्क की लागत ग्राहकों पर डालना पूरी तरह से ‘अन्यायपूर्ण’ होगा। यह एक व्यावसायिक परिचालन खर्च (Operational Cost) है, जिसे व्यापारियों को खुद ही समायोजित करना चाहिए।

  • डिजिटल लेनदेन बनाए रखने पर जोर: व्यापारियों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में यूपीआई ने नकदी प्रबंधन की चुनौतियों को काफी हद तक कम किया है। ऐसे में अचानक ग्राहकों से अतिरिक्त शुल्क मांगने से डिजिटल भुगतानों पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।

  • छोटे व्यापारियों की चिंताएं: निठारी मार्केट जैसे स्थानीय बाजारों के छोटे दुकानदारों का कहना है कि कम मार्जिन वाले उत्पादों पर एमडीआर शुल्क का असर पड़ेगा, लेकिन वे प्रतिस्पर्धी बाजार में टिके रहने के लिए इस लागत को सहने के लिए तैयार हैं।

व्यापारिक संतुलन और भविष्य की रणनीति

नोएडा का व्यापारिक समुदाय सरकार और वित्तीय संस्थानों से छोटे व मध्यम स्तर के व्यापारियों (MSMEs) के लिए राहत की उम्मीद कर रहा है:

  1. मार्केट कम्पटीशन और ग्राहक वफादारी: आज के दौर में ग्राहकों को बनाए रखना सबसे महत्वपूर्ण है। इसलिए व्यापारी वर्ग शांतिपूर्ण और विनम्र तरीके से इस लागत का अवशोषण (Absorb) करने की योजना बना रहा है।

  2. स्पष्ट नीतिगत दिशानिर्देशों की मांग: व्यापारी संगठनों का कहना है कि एमडीआर की सीमाओं और स्लैब को लेकर और अधिक स्पष्टता होनी चाहिए ताकि किसी भी तरह का भ्रम न रहे।

‘ऑल राइट्स मैगजीन’ डिजिटल अर्थव्यवस्था को सुगम बनाने में नोएडा के व्यापारी वर्ग की इस सकारात्मक और जन-हितैषी पहल की सराहना करती है।

गोपाल चन्द्र अग्रवाल,

सीनियर एडिटर (Allrights Magazine)

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