सड़क सुरक्षा और दुर्घटनाओं के बढ़ते मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है।

देश भर में 2024 में कुल 4.7 लाख सड़क दुर्घटनाएं हुईं जिसमें करीब 1.7 लाख लोगों की मौत हुई और 2.3 लाख गंभीर रूप से घायल हुए। जब आंकड़े होते हैं तभी उनका विश्लेषण करके दुर्घटनाएं रोकने की योजना और भविष्य की नीति तय की जा सकती है।

लेकिन चिंता की बात ये है कि 2025 की सड़क दुर्घटना के आंकड़े बताने वाली वार्षिक रिपोर्ट अभी तक प्रकाशित ही नहीं हुई है। जबकि सुप्रीम कोर्ट ने 17 अप्रैल 2025 को आदेश दिया था कि सड़क दुर्घटनाओं की वार्षिक रिपोर्ट वर्ष खत्म होने से छह महीने के भीतर हर साल प्रकाशित होनी चाहिए।

2025 की सड़क दुर्घटना रिपोर्ट में देरी पर SC सख्त

अब सुप्रीम कोर्ट ने वार्षिक रिपोर्ट के प्रकाशन में देरी को सख्ती से लिया है और केंद्र को नोटिस जारी करते हुए पूछा है कि वार्षिक रिपोर्ट प्रकाशित करने के आदेश का पालन क्यों नहीं किया गया और केंद्र सरकार का प्रस्ताव क्या है। कोर्ट ने केंद्र से अवमानना अर्जी पर 25 नवंबर तक जवाब मांगा है।

ये नोटिस न्यायमूर्ति जेबी पार्डीवाला और केवी विश्वनाथन की पीठ ने गत शुक्रवार को वकील केसी जैन की अवमानना अर्जी पर जारी किये। इससे पहले जैन ने स्वयं बहस करते हुए कोर्ट को बताया कि 2025 की सड़क दुर्घटनाओं की वार्षिक रिपोर्ट अभी तक प्रकाशित नहीं हुई है। जबकि सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल ही आदेश दिया कि हर साल वार्षिक रिपोर्ट वर्ष खत्म होने से छह महीने के भीतर प्रकाशित होनी चाहिए।

SC ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा

इस हिसाब से 2025 की रिपोर्ट 30 जून 2026 तक प्रकाशित हो जानी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं की वार्षिक रिपोर्ट तभी उपयोगी हो सकती है जब उसे समय पर प्रकाशित किया जाए।

2024 की रिपोर्ट भी लगभग एक वर्ष की देरी से आयी थी। कहा समय पर आंकड़े नहीं मिलेंगे तो दुर्घटनाएं कैसे रुकेंगी। कोर्ट ने बहस सुनने के बाद नोटिस जारी कर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है कि आदेश का पालन क्यों नहीं किया गया।

जैन की याचिका में कहा गया है कि सड़क दुर्घटनाओं की वार्षिक रिपोर्ट महज सरकारी आंकड़ों का संकलन नहीं है। इससे पता चलता है कि किन राज्यों, जिलों और सड़कों पर सबसे अधिक दुर्घटनाएं हो रही हैं।

उनके प्रमुख कारण क्या हैं और उन्हें रोकने के लिए कहां तत्काल कदम उठाने की जरूरत है। इन आंकड़ों के आधार पर केंद्र और राज्य सरकारें, पुलिस, नगर निकाय, लोक निर्माण विभाग और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण दुर्घटना संभावित स्थानों की पहचान कर आवश्यक सुधार कर सकता है।

आगरा में भारी वाहनों से हो रही मौतों का मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट

आगरा में भारी वाहनों से हो रही मौतों का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है। आगरा में 400 करोड़ का उत्तरी बाईपास बनने के बावजूद भारी वाहन शहर से गुजर रहे जो कि अक्सर दुर्घटनाओं का कारण बनते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे को उठाने वाली एक अर्जी पर केंद्र सरकार और संबंधित प्राधिकरण को नोटिस जारी किया है।

आगरा के रहने वाले सुप्रीम कोर्ट के वकील केसी जैन ने अर्जी दाखिल कर कहा है कि बाईपास होने के बावजूद भारी वाहन शहर के भीतर से होकर गुजरते हैं।

400 करोड़ की लागत से आगरा का उत्तरी बाइपास बनकर चालू हो चुका है, फिर भी ऐसे भारी वाहन जिन्हें आगरा में रुकना ही नहीं है, शहर के बीच से गुजर रहे हैं।

इससे स्कूली बच्चों, मरीजों, पैदल यात्रियों, दोपहिया वाहनों, चालकों और आम नागरिकों की जान को लगातार खतरा बना हुआ है। पीठ ने दलीलें सुनने के बाद अर्जी पर नोटिस जारी किया।

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