रक्षा क्षेत्र में ‘मेक इन इंडिया’ का जलवा
AtmanirbharBharat का असर: रक्षा क्षेत्र में ‘मेक इन इंडिया’ का परचम, लड़ाकू विमानों से लेकर मिसाइलों तक आत्मनिर्भर बना भारत
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ (Atmanirbhar Bharat) के आह्वान को देश के रक्षा क्षेत्र (Defence Sector) ने धरातल पर उतारकर एक नई मिसाल कायम की है। कभी अपनी सैन्य जरूरतों के लिए प्रमुख रूप से विदेशी आयातों पर निर्भर रहने वाला भारत अब ‘मेक इन इंडिया’ (Make in India) पहल के तहत न केवल स्वदेशी हथियारों का निर्माण कर रहा है, बल्कि दुनिया भर में एक सशक्त रक्षा भागीदार (Defence Partner) के रूप में उभर रहा है। ‘आत्मनिर्भरता’ अब महज एक हैशटैग न रहकर आधुनिक सैन्य साजो-सामान के रूप में देश की ताकत बन चुकी है।
स्वदेशी रक्षा तकनीकों का दमदार प्रदर्शन भारतीय रक्षा क्षेत्र में हुए तकनीकी बदलाव और नई उपलब्धियां भारत की बढ़ती सैन्य क्षमता को दर्शाती हैं:
-
तेजस (Tejas): स्वदेशी हल्का लड़ाकू विमान (LCA), जो भारतीय वायुसेना की ताकत को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहा है।
-
ब्रह्मोस (BrahMos): दुनिया की सबसे तेज और सटीक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल।
-
आईएनएस विक्रांत (INS Vikrant): देश का पहला स्वदेशी विमानवाहक पोत (Aircraft Carrier), जो महासागरों में भारत की मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है।
-
अर्जुन टैंक व पिनाका रॉकेट सिस्टम (Arjun & Pinaka): थलसेना के लिए घातक मारक क्षमता और आधुनिक तकनीक से लैस स्वदेशी प्रणाली।
रोजगार, नवाचार और वैश्विक निर्यात का नया अध्याय रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का यह सफर सिर्फ सैन्य शक्ति के प्रदर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश में उच्च तकनीक, नवाचार (Innovation) और बड़े पैमाने पर नए रोजगार के अवसरों का सृजन कर रहा है। आज भारत न केवल अपनी सीमाओं को सुरक्षित कर रहा है, बल्कि मित्र देशों को स्वदेशी रक्षा उपकरणों का निर्यात कर ‘मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड’ के संकल्प को गति दे रहा है।
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,
सीनियर एडिटर (Allrights Magazine)

