दिल्ली में पटाखों पर प्रतिबंध को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई: अदालत ने कहा— धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाए बिना निकालेंगे संतुलित रास्ता
“सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली में पटाखों पर प्रतिबंध को लेकर सुनवाई: अदालत ने संतुलन बनाने और समय सीमित करने पर दिया जोर”
नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण के स्तर को देखते हुए पटाखों पर प्रतिबंध से जुड़े लंबे समय से लंबित मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर महत्वपूर्ण सुनवाई की है। अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें सुनते हुए इस मामले में पूरी तरह पाबंदी लगाने के बजाय एक संतुलित तरीका अपनाने पर विचार करने की बात कही है।
1. मुख्य न्यायाधीश की बेंच की टिप्पणियां
भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच के समक्ष इस मामले की सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि इस मुद्दे पर व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है:
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समय सीमित करने पर विचार: मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि लोगों से अपील करने और पटाखे जलाने के समय को सीमित करने पर विचार करने के लिए अभी भी काफी समय है।
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धार्मिक भावनाओं का सम्मान: मुख्य न्यायाधीश ने यह भी स्पष्ट किया कि “हम धार्मिक भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचाएंगे, लेकिन हम देखेंगे कि संतुलित तरीका क्या हो सकता है।” साथ ही, उन्होंने जन-जागरूकता और नागरिक जिम्मेदारी के महत्व को भी रेखांकित किया।
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पूर्ण प्रतिबंध की व्यावहारिकता: मुख्य न्यायाधीश ने पिछली सुनवाई का जिक्र करते हुए यह भी कहा था कि यदि अदालत दिल्ली-NCR में पटाखों पर पूरी तरह रोक लगा देती है, तो लोग दिन के समय ही पटाखे जलाना शुरू कर देते हैं, जिससे ऐसे नियमों का पालन कराना प्रशासन के लिए चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
2. सुनवाई के दौरान ‘धर्म और पटाखे’ पर बहस
मामلا की सुनवाई के दौरान वकीलों और जजों के बीच पटाखों के इस्तेमाल को लेकर तीखी और तार्किक चर्चा देखने को मिली:
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धार्मिक स्वतंत्रता का सवाल: एक वकील ने कोर्ट में तर्क दिया कि पटाखे जलाना धार्मिक स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का हिस्सा नहीं है। वकील का कहना था कि पूजा-पाठ धार्मिक आस्था की अभिव्यक्ति है, लेकिन पटाखे जलाना वैसा नहीं है और इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि “भगवान भी हैरान रह जाएंगे।”
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जस्टिस जॉयमाल्य बागची की टिप्पणी: सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने सवाल उठाया कि आखिरकार पटाखों को धर्म से क्यों जोड़ा जा रहा है? उन्होंने कहा कि “पटाखों का धर्म से क्या लेना-देना है?”
अदालत इस मामले में पर्यावरण संरक्षण, नागरिकों के स्वास्थ्य और सांस्कृतिक परंपराओं के बीच संतुलन बिठाने के लिए सभी पहलुओं पर विचार कर रही है।
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