छात्र प्रदर्शन: पैलेट गन से गई रोशनी
‘एक आंख की रोशनी गई, नींद भी नहीं आती’: जंतर-मंतर संसद मार्च में पैलेट गन से जख्मी छात्रों का दर्द; बोले— निशान रहेंगे, पर मलाल नहीं
राजधानी नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर बीते 20 जुलाई को शिक्षा सुधारों की मांग को लेकर आयोजित छात्र प्रदर्शन और ‘संसद मार्च’ के दौरान हुई हिंसा के जख्म अब भी हरे हैं। पुलिस की ओर से किए गए लाठीचार्ज और पैलेट गन के इस्तेमाल में घायल हुए दर्जनों छात्रों ने अपने खौफनाक अनुभवों को साझा किया है। कई छात्र अब भी गंभीर हालत में अस्पतालों में भर्ती हैं और कई सर्जरियों से गुजर रहे हैं, वहीं एक छात्र की एक आंख की रोशनी हमेशा के लिए जाने की आशंका जताई गई है।
गंभीर शारीरिक चोटों और अनिश्चित भविष्य के बावजूद, पीड़ित छात्रों का कहना है कि उन्हें अधिकार और शिक्षा सुधार के इस आंदोलन का हिस्सा बनने का कोई पछतावा या मलाल नहीं है।
“शरीर पर निशान रहेंगे, लेकिन संघर्ष का कोई मलाल नहीं”
आंदोलन के दौरान घायल हुए छात्र इरशाद शेख और साहिल लोछाब सहित अन्य पीड़ितों ने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि 20 जुलाई का दिन वे कभी नहीं भूल सकते।
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रोशनी जाने का खतरा: डॉक्टरों के मुताबिक, पैलेट गन के छर्रे लगने से कई छात्रों की आंखों और संवेदनशील अंगों में गंभीर चोटें आई हैं। एक छात्र की आंख की रोशनी लौटने की संभावना न के बराबर बताई गई है।
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दर्दनाक अनुभव: पीड़ितों का कहना है कि घावों के दर्द के कारण उन्हें रातों को नींद नहीं आती, लेकिन उनके हौसले अब भी पस्त नहीं हुए हैं। वे इसे अपनी आवाज दबाने की कोशिश मानते हैं।
दिल्ली पुलिस का पक्ष: हिंसक भीड़ पर नियंत्रण के लिए हुआ बल प्रयोग
दूसरी ओर, इस पूरे मामले पर दिल्ली पुलिस का स्पष्ट कहना है कि प्रदर्शनकारी तय सीमा तोड़कर संसद भवन की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे थे। पुलिस अधिकारियों के अनुसार:
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पथराव और उपद्रव: प्रदर्शन के दौरान भीड़ अचानक उग्र हो गई और पुलिसकर्मियों पर भारी पथराव शुरू कर दिया।
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सुरक्षात्मक कार्रवाई: स्थिति को नियंत्रित करने, कानून-व्यवस्था बनाए रखने और सरकारी संपत्ति की सुरक्षा हेतु न्यूनतम बल का प्रयोग (लाठीचार्ज और पैलेट/टीयर गैस) किया गया।
इस घटना के बाद से ही छात्र संगठनों और विपक्ष ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की जा रही है।
(रिपोर्ट: सोनू कुमार (पत्रकार)
(गोपाल चन्द्र अग्रवाल,)
सीनियर एडिटर (Allrights Magazine)

