शेखपुरा: नीलाम वादों पर कड़ा रुख
बिहार: लंबित नीलाम पत्र वादों पर चला प्रशासन का चाबुक; लापरवाह अधिकारियों पर होगी सख्त कार्रवाई, सरकारी बकाया वसूली की कवायद तेज
बिहार एवं उड़ीसा लोक मांग वसूली अधिनियम 1914 के अंतर्गत सालों से लंबित पड़े नीलाम पत्र वादों (Certificate Cases) के त्वरित निष्पादन और सरकारी राजस्व की शत-प्रतिशत वसूली को लेकर शेखपुरा जिला प्रशासन पूरी तरह सख्त हो गया है। शुक्रवार को समाहरणालय सभागार में अपर समाहर्ता (एडीएम) सह नोडल पदाधिकारी (जिला नीलाम शाखा) श्री लखींद्र पासवान की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समीक्षा सह विशेष प्रशिक्षण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में ढुलमुल रवैया अपनाने वाले और सुस्त अधिकारियों को दो टूक चेतावनी दी गई।
अधिनियम के कानूनी पहलुओं का मिला प्रशिक्षण, वसूली सर्वोच्च प्राथमिकता
बैठक के दौरान उपस्थित सभी नीलाम पत्र पदाधिकारियों को संबंधित अधिनियम की बारीकियों और कानूनी पहलुओं पर विस्तृत प्रशिक्षण दिया गया ताकि मामलों के निष्पादन में कोई तकनीकी या कानूनी अड़चन न आए।
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त्वरित निष्पादन के निर्देश: अपर समाहर्ता लखींद्र पासवान ने सभी जिला स्तरीय नीलाम पत्र पदाधिकारियों को कड़ा निर्देश दिया कि वे अपने-अपने विभागों से जुड़े लंबित अभिलेखों का कानून सम्मत और त्वरित गति से निष्पादन सुनिश्चित करें।
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वसूली को रफ्तार: उन्होंने स्पष्ट किया कि विभिन्न सरकारी कल्याणकारी, वित्तीय एवं विकास योजनाओं की बकाया राशि की वसूली करना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इसमें किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
“सरकारी धन का समय पर संकलन बेहद जरूरी है ताकि जनहित के विकास कार्यों को गति दी जा सके। सभी संबंधित पदाधिकारी अपने विभागों की लंबित राशियों को तत्काल चिन्हित करें और नोटिस व कुर्की-जब्ती जैसी कानूनी प्रक्रियाओं के जरिए वसूली में तेजी लाएं।” — श्री लखींद्र पासवान, अपर समाहर्ता
सख्त चेतावनी: लापरवाह अफसरों के खिलाफ होगी अनुशासनात्मक कार्रवाई
समीक्षा के दौरान कई विभागों में वादों के निष्पादन की गति धीमी पाए जाने पर नोडल पदाधिकारी ने गहरी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने सभी अधिकारियों को एक निश्चित समय-सीमा (Dead Line) के भीतर प्रभावी कार्रवाई करने का अल्टीमेटम दिया। उन्होंने साफ शब्दों में सचेत किया कि जिन पदाधिकारियों की प्रगति रिपोर्ट असंतोषजनक या संदेहास्पद पाई जाएगी, उनके खिलाफ नियमानुसार कड़ी अनुशासनात्मक और विभागीय कार्रवाई के लिए वरीय अधिकारियों को संस्तुति भेज दी जाएगी।
बैठक में इन विभागों के आला अधिकारी रहे मौजूद
प्रशासनिक अमले को चुस्त-दुरुस्त करने के उद्देश्य से बुलाई गई इस अहम बैठक में जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी, भूमि सुधार उप समाहर्ता (DCLR), जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO), जिला पंचायती राज पदाधिकारी (DPRO), जिला कृषि पदाधिकारी (DAO) और जिला सहकारिता पदाधिकारी मुख्य रूप से उपस्थित थे। इसके साथ ही जिले के सभी प्रखंडों के प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO), अंचलाधिकारी (CO) और बैंक व अन्य ऋण प्रदाता विभागों के अधिकारी भी शामिल हुए।
इस उच्च स्तरीय समीक्षा और प्रशिक्षण के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि जिले में वर्षों से धूल फांक रहे नीलाम पत्र वादों के निपटारे में तेजी आएगी और डिफ़ॉल्टरों से सरकारी पैसे की रिकवरी जल्द पूरी की जा सकेगी।
(शेखपुरा – उमेश कुमार)
गोपाल चन्द्र अग्रवाल,सीनियर एडिटर
(Allrights Magazine)

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