शेखपुरा में ईंट-भट्ठा बच्चों को स्कूल किट
बिहार: ईंट-भट्ठों के बच्चों तक पहुंची शिक्षा की रोशनी; शेखपुरा में 125 बच्चों को मिली स्कूल किट, महिलाओं को मिला स्वच्छता का पाठ
रिपोर्ट: उमेश कुमार,शेखपुरा(बिहार)
(शेखपुरा/बिहार): शेखपुरा जिला प्रशासन की एक बेहद सराहनीय और संवेदनशील पहल से अब समाज के सबसे वंचित तबके के बच्चों के जीवन में भी शिक्षा का उजियारा फैलने लगा है। जिला पदाधिकारी (DM) के विशेष मार्गदर्शन में, ईंट-भट्ठों पर कठिन परिस्थितियों में काम करने वाले प्रवासी व स्थानीय श्रमिकों के बच्चों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने का महाअभियान तेज कर दिया गया है [cite: शेखपुरा: जिला प्रशासन की पहल पर अब ईंट-भट्ठों पर काम करने वाले श्रमिकों के बच्चे भी शिक्षा की मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं।, डीएम के मार्गदर्शन में पहल:]।
इसी कड़ी में बुधवार को ‘जिला हब फॉर विमेन’ की टीम ने जिले के तीन अलग-अलग प्रखंडों के ईंट-भट्ठों का दौरा किया। वहां संचालित विशेष ‘अक्षर लर्निंग सेंटर’ में पढ़ाई कर रहे १२५ बच्चों के बीच स्कूल किट का वितरण कर उन्हें नियमित रूप से पढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया गया [cite: बुधवार को ‘जिला हब फॉर विमेन’ की टीम ने जिले के 3 प्रखंडों के ईंट-भट्ठों पर चल रहे ‘अक्षर लर्निंग सेंटर’ के 125 बच्चों को स्कूल किट बांटकर उन्हें पढ़ाई के लिए प्रेरित किया।]।
इन ३ प्रखंडों की पंचायतों में बांटी गई स्कूल किट
प्रशासन की टीम ने सुदूर ग्रामीण इलाकों में सक्रिय ईंट-भट्ठों को चिह्नित कर इस अभियान को धरातल पर उतारा:
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शेखपुरा प्रखंड: पैन पंचायत के अंतर्गत संचालित ईंट-भट्ठा।
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शेखोपुरसराय प्रखंड: वेलाव पंचायत स्थित ईंट-भट्ठा।
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बरबीघा प्रखंड: सामसखुर्द पंचायत के क्षेत्र में आने वाला ईंट-भट्ठा।
‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ के तहत चमके बच्चों के चेहरे
केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ के अंतर्गत बच्चों को पढ़ाई के लिए जरूरी सभी आवश्यक सामग्रियां उपलब्ध कराई गईं [cite: किट में क्या मिला: ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ योजना के तहत बच्चों को स्कूल बैग, पानी बोतल, कॉपी, स्लेट, किताबें, ड्राइंग बुक, पेंसिल बॉक्स और क्रेयॉन रंग दिए गए।]। वितरित की गई इस सुंदर स्कूल किट में शामिल थे:
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आकर्षक स्कूल बैग और पानी की बोतल।
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कॉपियां, किताबें, ड्राइंग बुक और स्लेट [cite: किट में क्या मिला: ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ योजना के तहत बच्चों को स्कूल बैग, पानी बोतल, कॉपी, स्लेट, किताबें, ड्राइंग बुक, पेंसिल बॉक्स और क्रेयॉन रंग दिए गए।]।
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पेंसिल बॉक्स और रंग-बिरंगे क्रेयॉन कलर्स। पहली बार अपने निजी स्कूल बैग और रंग-किताबें पाकर ईंट-भट्ठों पर रहने वाले इन मासूम बच्चों के चेहरे खुशी से खिल उठे।
श्रमिक महिलाओं व किशोरियों के लिए ‘स्वास्थ्य और अधिकार’ सत्र
स्कूल किट वितरण के साथ-साथ ‘जिला हब फॉर विमेन’ की टीम ने ईंट-भट्ठों पर काम करने वाली महिला श्रमिकों और किशोरियों के साथ एक बेहद महत्वपूर्ण जागरूकता बैठक भी की। इस चौपाल में मुख्य रूप से तीन गंभीर मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई:
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१. माहवारी स्वच्छता (Menstrual Hygiene): महिलाओं को पीरियड्स या माहवारी के दौरान साफ-सफाई रखने के महत्व को गहराई से समझाया गया। टीम ने जागरूक करते हुए कहा कि इस दौरान स्वच्छता न बरतने से गंभीर बीमारियों और संक्रमण का खतरा काफी बढ़ जाता है [cite: 1. स्वास्थ्य: माहवारी के दौरान साफ-सफाई का महत्व बताया गया। कहा गया कि स्वच्छता न रखने से बीमारी का खतरा बढ़ता है। ]।
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२. बेटियों की शिक्षा पर जोर: बैठक में माताओं से भावुक अपील की गई कि वे बेटों की तरह अपनी बेटियों को भी हर दिन स्कूल या लर्निंग सेंटर जरूर भेजें। शिक्षा ही वह इकलौता हथियार है जो इन बच्चियों को आगे चलकर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाएगा।
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३. सरकारी योजनाओं की मास्टरक्लास: ग्रामीण महिलाओं को केंद्र व राज्य सरकार द्वारा महिलाओं और बच्चों के लिए चलाई जा रही विभिन्न कल्याणकारी व वित्तीय योजनाओं की आसान भाषा में जानकारी दी गई, ताकि वे अपनी पात्रता के अनुसार सीधे लाभ उठा सकें [cite: 3. योजनाएं: केंद्र और राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी गई और बताया गया कि पात्रता के हिसाब से लाभ कैसे लें। ]।
“एक शिक्षित बच्चा पूरे समाज का भविष्य बदलता है”
इस मौके पर विचार रखते हुए जिला मिशन समन्वयक पंकज कुमार वर्मा ने माता-पिता की जिम्मेदारी को रेखांकित किया:
“शिक्षा ही दुनिया का एकमात्र ऐसा माध्यम है जिसके बल पर ये बच्चे बड़े होकर अपने पैरों पर खड़े हो सकते हैं और सम्मानजनक जीवन जी सकते हैं। एक शिक्षित बच्चा न सिर्फ खुद का, बल्कि अपने पूरे परिवार और समाज का भविष्य बदलने की ताकत रखता है। जब तक हमारी माताएं-बहनें अपने स्वास्थ्य और अधिकारों के प्रति खुद सजग नहीं होंगी, तब तक समाज को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता।” [cite: जिला मिशन समन्वयक पंकज कुमार वर्मा ने कहा, “शिक्षा ही इकलौता माध्यम है जिससे बच्चे अपने पैरों पर खड़े हो सकते हैं। एक शिक्षित बच्चा पूरे परिवार और समाज का भविष्य बदलता है। जब तक माताएं-बहनें स्वास्थ्य और अधिकारों के प्रति जागरूक नहीं होंगी, समाज आगे नहीं बढ़ेगा।]
सुदूर इलाकों तक विकास पहुंचाने का लक्ष्य:
प्रशासन का मुख्य लक्ष्य महादलित, महावंचित और समाज के अंतिम पायदान पर खड़े परिवारों की महिलाओं व बच्चों को स्वास्थ्य, अधिकार और बेहतर शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना है। इस सफल कार्यक्रम के दौरान हब के समस्त कर्मी, स्थानीय सरकारी शिक्षक, भट्ठा संचालक और बड़ी संख्या में ग्रामीण व श्रमिक उपस्थित रहे।
(गोपाल चन्द्र अग्रवाल,संपादक)
एडिटर (Allrights Magazine)

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