रिठौरा पुलिस पर फर्जी मुठभेड़ का आरोप

तत्कालीन रिठौरा चौकी पुलिस पर फर्जी मुठभेड़ का आरोप; महिला ने एसएसपी से की न्याय की गुहार

बरेली: जनपद के थाना हाफिजगंज क्षेत्र के ग्राम लभेड़ा से पुलिस कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाने वाला मामला सामने आया है। एक महिला ने तत्कालीन रिठौरा चौकी पुलिस पर घर में घुसकर अभद्रता करने, मारपीट करने और उसके पति को फर्जी मुठभेड़ में गोली मारने का सनसनीखेज आरोप लगाया है। इस मामले में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) को प्रार्थना पत्र देकर निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।


घर में घुसकर मारपीट और अभद्रता का आरोप

प्रार्थिनी श्रीमती नफीसा (पत्नी मोहम्मद यासीन खां) ने अपनी शिकायत में घटना का सिलसिलेवार विवरण दिया है:

  • पूछताछ का बहाना: आरोप है कि 19 अप्रैल 2026 को तत्कालीन चौकी इंचार्ज वैभव गुप्ता ने सत्यापन के नाम पर मोहम्मद यासीन खां को चौकी बुलाया और फिर घर भेज दिया।

  • आधी रात को घेराबंदी: आरोप के अनुसार, उसी रात करीब 11 बजे पुलिस टीम ने कई वाहनों के साथ घर को चारों ओर से घेर लिया और जबरन दाखिल हो गए।

  • महिलाओं से बदसलूकी: नफीसा का दावा है कि पुलिसकर्मियों ने घर की महिलाओं के साथ गाली-गलौज और मारपीट की। विरोध करने पर मोबाइल फोन भी छीन लिए गए।

फर्जी मुठभेड़ और पैर में गोली लगने का दावा

महिला ने आरोप लगाया कि पुलिस उनके बेटों—अजमल और अफजल—और पति मोहम्मद यासीन को जबरन उठाकर ले गई।

  • अस्पताल में मिले पति: रातभर तलाश करने के बाद, अगले दिन 20 अप्रैल की सुबह सूचना मिली कि मोहम्मद यासीन जिला अस्पताल में भर्ती हैं और उनके पैर में गोली लगी है।

  • फर्जी एनकाउंटर का आरोप: प्रार्थिनी का कहना है कि पुलिस ने अपनी नाकामी छुपाने के लिए फर्जी मुठभेड़ दिखाई और उनके पति को गोली मार दी।

“गौकशी के मुकदमे में झूठा फंसाया”

शिकायत में यह भी कहा गया है कि थाना नवाबगंज में दर्ज एक गौकशी के मामले में जब असली आरोपी नहीं मिले, तो पुलिस ने उनके निर्दोष परिवार को बलि का बकरा बना दिया। नफीसा का दावा है कि उनके पति और बेटों का किसी भी आपराधिक गतिविधि से कोई लेना-देना नहीं है।

निष्पक्ष जांच की मांग

पीड़ित महिला ने एसएसपी से गुहार लगाई है कि तत्कालीन चौकी इंचार्ज और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। महिला ने मांग की है कि मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच हो ताकि उनके निर्दोष परिवार को न्याय मिल सके और पुलिस की इस कथित बर्बरता पर रोक लग सके।


(रोहिताश कुमार भास्कर)

(ब्यूरो प्रमुख) varun agarwal

गोपाल चन्द्र अग्रवाल,

सीनियर एडिटर(Allrights Magazin)


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